बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने अपनी आगामी फिल्म की रिलीज़ से पूर्व आंध्र प्रदेश के पवित्र तिरुमला मंदिर में दर्शन के दौरान कोटा की सोनचिरैया की रियल ज़री कोटा साड़ी धारण कर राजस्थान की ऐतिहासिक हस्तकरघा परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। सोने-चाँदी के धागों से बुनी इस विरासती साड़ी ने एक बार फिर कोटा की पारंपरिक बुनाई कला को देशभर में चर्चा का विषय बना दिया है।

सोनचिरैया की संस्थापक प्रीति सिंह पारीक ने बताया कि रियल ज़री कोटा साड़ी कोई साधारण वस्त्र नहीं, बल्कि सदियों पुरानी उस बुनाई परंपरा का जीवंत प्रमाण है जो कभी केवल राजघरानों और विशेष अवसरों तक सीमित थी। इस विशिष्ट बुनाई में शुद्ध रेशम और सूती धागों को असली सोने एवं चांदी के ज़री धागों के साथ मिलाकर पारंपरिक पिटलूम पर हाथ से बुना जाता है। यह अत्यंत धीमी, कठिन और असाधारण कौशल की मांग करने वाली प्रक्रिया है, जिसमें कोटा के बुनकर परिवार पीढ़ियों से अपनी साधना समर्पित करते आए हैं।

प्रीति सिंह पारीक ने बताया कि विगत कुछ वर्षों में इस लुप्त होती परंपरा को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया गया और रियल गोल्ड व सिल्वर ज़री की इस विरासती बुनाई को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठा दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए गए। इन प्रयासों का परिणाम अब व्यापक स्तर पर दिखाई देने लगा है।

जाह्नवी कपूर से पूर्व भी अनेक प्रतिष्ठित हस्तियां कोटा ज़री साड़ी की गरिमा को राष्ट्रीय पहचान दिला चुकी हैं। इनमें महारानी राधिका राजे गायकवाड़, महारानी अम्बिका राजे, मयूरभंज की महारानी रश्मि राजे, उद्योगपति टीना अंबानी, जिन्होंने अनंत-राधिका विवाह समारोह में इस साड़ी को धारण किया था, तथा बोट (boAt) के संस्थापक अमन गुप्ता की धर्मपत्नी प्रिया गुप्ता शामिल हैं। इन हस्तियों द्वारा कोटा की रियल ज़री साड़ी को अपनाए जाने से इसकी प्रतिष्ठा लगातार बढ़ी है।

वस्त्र विशेषज्ञों का मानना है कि यह परिवर्तन ऐतिहासिक महत्व का है। आज कोटा डोरिया केवल एक क्षेत्रीय वस्त्र परंपरा नहीं रह गई है, बल्कि भारत की हेरिटेज लक्ज़री टेक्सटाइल के रूप में वैश्विक पहचान प्राप्त कर रही है। जाह्नवी कपूर जैसी युवा पीढ़ी की प्रतिष्ठित अभिनेत्री द्वारा इस परंपरा को अपनाया जाना इस बात का सशक्त संकेत है कि भारत की प्राचीन हस्तकरघा विरासत पुनः अपने गौरवपूर्ण स्थान की ओर अग्रसर है। कोटा की रियल ज़री साड़ी की यह राष्ट्रीय उपस्थिति न केवल हाड़ौती की सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान दे रही है, बल्कि पारंपरिक बुनकरों की पीढ़ियों पुरानी कला को भी नया सम्मान और व्यापक मंच प्रदान कर रही है।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story