जयपुर: मनरेगा के नाम पर राजनीति का खेल, भाजपा उपाध्यक्ष छगन माहुर ने कांग्रेस के दावों को नकारा
जयपुर में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष छगन माहुर ने कांग्रेस के मनरेगा जन जागृति अभियान पर तीखा पलटवार किया है। माहुर ने कांग्रेस पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने मनरेगा के कार्यदिवस 100 से बढ़ाकर 125 कर दिए हैं, जो ग्रामीण विकास की दिशा में बड़ा कदम है। नाम की राजनीति के बजाय भाजपा का फोकस अब गरीबों के आर्थिक सशक्तिकरण और विकसित भारत के निर्माण पर है।

राजस्थान की सियासत में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) एक बार फिर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी का केंद्र बन गई है। कांग्रेस द्वारा मनरेगा को लेकर चलाए जा रहे 'जन जागृति अभियान' पर कड़ा प्रहार करते हुए राजस्थान भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं प्रदेश ओबीसी प्रभारी छगन माहुर ने विपक्षी दल पर जनता को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया है। माहुर ने दो टूक शब्दों में कहा कि कांग्रेस आज केवल नाम की राजनीति कर रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी का विजन ग्रामीण भारत के सर्वांगीण विकास और आजीविका के वास्तविक सशक्तिकरण पर केंद्रित है।
छगन माहुर ने कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए याद दिलाया कि इतिहास में कांग्रेस ने स्वयं मनरेगा के नाम में तीन बार बदलाव किए थे, लेकिन उस समय उन्हें महात्मा गांधी की गरिमा और नाम की याद नहीं आई। उन्होंने कहा कि आज जब केंद्र की मोदी सरकार ग्रामीण उत्थान के लिए ठोस कदम उठा रही है, तो कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए भ्रामक प्रचार का सहारा ले रही है। माहुर के अनुसार, नाम बदलना कोई बड़ी बात नहीं है, असली बदलाव वह है जो धरातल पर गरीबों के जीवन में सुधार लाए। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए अब मनरेगा के तहत मिलने वाले 100 दिन के रोजगार को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है, जो ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में मील का पत्थर साबित होगा।
केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए माहुर ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य केवल योजनाएं चलाना नहीं, बल्कि 'विकसित भारत' के संकल्प के साथ सामाजिक और ग्रामीण उत्थान सुनिश्चित करना है। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष का ध्यान केवल राजनीति चमकाने पर है, जबकि लोगों के कल्याण और उन्हें अधिक रोजगार मुहैया कराने के मुद्दों पर उनकी चुप्पी उनकी मंशा को उजागर करती है। 125 दिनों की रोजगार गारंटी को एक क्रांतिकारी कदम बताते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि इन बदलावों से ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि आएगी।
इस वैचारिक युद्ध ने प्रदेश में ग्रामीण विकास के मुद्दों को फिर से चर्चा के शीर्ष पर ला दिया है। जहां कांग्रेस जन जागृति के नाम पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है, वहीं छगन माहुर के नेतृत्व में भाजपा ने विकास के आंकड़ों और कार्यदिवसों में वृद्धि के तर्क के साथ इस अभियान की हवा निकालने की कोशिश की है। अंततः, इस राजनीतिक खींचतान के बीच ग्रामीण जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि योजनाओं के ये नए स्वरूप उनके जीवन में कितना वास्तविक परिवर्तन लाते हैं।

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