भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर किसान महासभा का विरोध: मनोज दुबे ने जताया आक्रोश
किसान महासभा के अध्यक्ष मनोज दुबे ने अमेरिका के साथ कृषि व्यापार समझौते को भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।

कोटा में 4 फरवरी 2026 को भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के अध्यक्ष मनोज दुबे ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ बयान जारी कर किसानों की बर्बादी की चेतावनी दी।
कोटा, 4 फ़रवरी। भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील को देश के किसानों के हितों के साथ कुठाराघात बताते हुए कहा की अमेरिका के साथ ट्रेड डील कर केंद्र की भाजपा सरकार ने भारत और भारतीय किसानों के साथ घोर छलावा और धोखा किया है।
केंद्र की भाजपा सरकार ने भारतीय किसानों का हक़ मारकर अमेरिका के किसानों के लिए भारत का बाज़ार खोल दिया है। जिसका देश के किसानों एवं खेती किसानी को भारी नुकसान होगा। इससे किसानों की आमदनी घटेगी और देश में महंगाई और बढ़ेगी।
असमान टैरिफ और अर्थव्यवस्था पर प्रहार
मनोज दुबे ने कहा की "अमेरिका भारत में कृषि क्षेत्र में 0% टैरिफ में अपने उत्पाद बेचेगा और भारतीय किसान 18% टैरिफ में अपना उत्पाद अमेरिका में बेचेगें तो फिर इससे भारतीय किसानों को फायदा नहीं भारी नुकसान होगा? यह डील देश की 70% आबादी पर कड़ा प्रहार है पहले से बाजार की अस्थिरता कर्ज का बोझ झेल रहा ग्रामीण वर्ग अब बर्बाद हो जाएगा सोने की चिड़िया कहे जाने वाले देश पर अब कॉरपोरेट का कब्जा होगा सरकार तत्काल प्रभाव से इस समझौते को रद्द करें।"
हिंदुस्तान पर 3% से कम टैरिफ लगता था, अब 18% टैरिफ लगेगा। जिसका भारी नुकसान देश के किसानों का होगा।
देशी फसलों और छोटे किसानों पर संकट
मनोज दुबे ने कहा की भारत का किसान लागत, कर्ज़ और अनिश्चित बाज़ार से पहले से ही जूझ रहा है:
- अब सस्ते अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत आएंगे तो देशी फसलों के दाम गिरेंगे।
- एमएसपी कमजोर होगी और सबसे बड़ा नुकसान छोटे व सीमांत किसानों को होगा।
- अमेरिका के साथ ट्रेड डील भारत और भारतीय किसानों के साथ बहुत बड़ी ग़द्दारी और धोखा है।
भाजपा सरकार ने भारतीय किसानों का हक़ मारकर अमेरिका के किसानों के लिए भारत का बाज़ार खोल दिया है।
डेयरी सेक्टर और "मुक्त व्यापार" के खतरे
मनोज दुबे ने कहा की "अमेरिका से कृषि उत्पाद दूध–घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट भारत में 0% टैक्स पर आएंगे तो, भारतीय किसान की फसल, दूध का रेट, किसान की आमदनी क्या 'मुक्त व्यापार' का मतलब किसान को भारी नुकसान है?"
भारत का किसान ही भारत की रीढ़ है, भारत की कृषि ही भारत की मुख्य अर्थव्यवस्था है। भारत अमेरिका ट्रेड डील से भारत का कृषि बाजार अमेरिका के लिए खुल रहा है, डेयरी मार्केट खुल रहा है। इस ट्रेड डील से भारत का कृषि और डेयरी सेक्टर पूरी तरह से तबाह और बर्बाद हो जाएगा। भारत के किसानों एवं खेत-खलिहानों की तबाही का रास्ता भाजपा सरकार ने खोल दिया है।
किसानों की उपेक्षा और मोदी सरकार पर आरोप
मनोज दुबे ने कहा की अमेरिका कह रहा: "हमारे किसानों के प्रोडक्ट भारत में जीरो टैरिफ पर बिकेंगे, ट्रंप ने फायदा सुनिश्चित किया, पर हमारे देश के किसानों का क्या होगा? मोदी सरकार ने देश के किसानों की पीठ मे छुरा घोंपने का काम किया है। जिससे देश के किसानों मे गहरी चिंता एवं भारी आक्रोश व्याप्त है।"
मनोज दुबे ने कहा की एक तरफ भारत के किसानों को समय पर खाद, बीज और अपने कृषि उत्पादों का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा और ऊपर से अमेरिकी किसानों को भारतीय बाजार देना देश के किसानों को सुनियोजित तरीके से मारने का काम किया जा रहा है।
- अमेरिका तो इसलिए खुश है कि उनके किसानों को भारत जैसा विशाल बाजार मिलेगा, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि भारत के किसानों को क्या मिला?
- सरकार किसानों को डीएपी-यूरिया तक समय पर और मांग के अनुरूप दे नहीं पा रही है।
- खाद के बैग का वज़न लगातार कम करती जा रही है और किसान कर्ज से परेशान है।
ऐसी स्थिति मे किसानों को राहत के स्थान पर केंद्र सरकार ने भारी मुसीबत मे डाल दिया है, जो घोर निंदनीय एवं दुर्भाग्यपूर्ण है।

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