अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर आईसीएमएआई कोटा चैप्टर का सेमिनार, सहकारिता को बताया समाज सशक्तिकरण का आधार
आईसीएमएआई कोटा चैप्टर के अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस सेमिनार में विशेषज्ञों ने सहकारिता, वित्तीय समावेशन और लागत लेखाकारों की भूमिका पर रखे महत्वपूर्ण विचार।

तस्वीर में बाएं से दाएं, एक मंच पर खड़े आईसीएमएआई कोटा चैप्टर के पदाधिकारी और अतिथि मौजूद हैं, जहां मुख्य अतिथि बीना बैरवा को एक स्मृति चिन्ह भेंट किया जा रहा है।
इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएमएआई) कोटा चैप्टर द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर सीएमए भवन, कोटा में "सहकारिताएं बनाएं एक बेहतर दुनिया" थीम पर एक भव्य सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सहकारिता की भूमिका, वित्तीय समावेशन, सुशासन और लागत लेखाकारों के योगदान पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बीना बैरवा, प्रबंध निदेशक, कोटा नागरिक सहकारी बैंक लि. ने कहा कि सहकारिता केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज को सशक्त बनाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंक आमजन की आर्थिक उन्नति और वित्तीय समावेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
विशिष्ट अतिथि एडवोकेट सुरेश चंद काबरा, निदेशक, कोटा नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड ने कहा कि सुशासन, पारदर्शिता और कानूनी अनुपालन के माध्यम से ही सहकारी संस्थाएं दीर्घकालिक रूप से सफल हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि लागत लेखाकार इस दिशा में संस्थाओं को सही मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सीएमए सत्यनारायण मित्तल, रीजनल कॉउन्सिल मेम्बर एवं चेयरमैन प्रोफेशनल डवलोपमेन्ट कमेटी, नॉर्थन इंडिया रीजनल कॉउन्सिल ने कहा कि लागत एवं प्रबंधन लेखाकार सहकारिता क्षेत्र में लागत नियंत्रण, बजटिंग, आंतरिक नियंत्रण और वित्तीय दक्षता बढ़ाकर संस्थाओं को मजबूत बना सकते हैं। उन्होंने बताया कि देश के कई राज्यों की सहकारी संस्थाओं में लागत लेखाकार ऑडिट का कार्य भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं में लागत निर्धारण एवं सही वित्तीय कंट्रोल के माध्यम से संस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।
आईसीएमएआई कोटा चैप्टर के अध्यक्ष सीएमए सुरेन्द्र प्रकाश गुप्ता ने कहा कि सहकारिता आंदोलन आत्म-सहायता, लोकतंत्र और समानता के मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने सदस्यों से सहकारी संस्थाओं को पेशेवर सहयोग प्रदान करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन सचिव सीएमए एम.बी. सोंखिया ने किया, जबकि अंत में धन्यवाद ज्ञापन सीएमए तपेश माथुर ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर आर.पी. व्यास, आर.आर. मित्तल, मनोज जैन, पूर्वा अग्रवाल, आकाश अग्रवाल, के.बी. भावनानी, आर.ए. खंडेलवाल, जय बंसल, राजेंद्र नाटाणी, तपेश माथुर और कुलदीप मेहता सहित बड़ी संख्या में कोटा के सीएमए सदस्य एवं छात्र उपस्थित रहे। सेमिनार में गाजियाबाद एवं दिल्ली से पधारे सीएमए ने भी विशेष रूप से भाग लेकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम में सहकारिता के माध्यम से बेहतर समाज के निर्माण और पेशेवर सहयोग की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।

Pratahkal Bureau
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