कोटा। एसडीपी (सिंगल डोनर प्लेटलेट्स) डोनेशन के क्षेत्र में एक बार फिर कोटा ने मानवता की मिसाल पेश की है। शहर के ब्लड सेंटर के तकनीशियन वीरेंद्र मालव ने अपने समर्पण और तत्परता से एक गंभीर मरीज की जान बचाई।

घटना शहर के एक निजी अस्पताल में हुई, जहां डेंगू से पीड़ित ज्योति नागर की प्लेटलेट्स तेजी से गिर रही थीं। चिकित्सकों ने तत्काल एसडीपी डोनेशन की सलाह दी। परिजनों ने जैसे ही ब्लड बैंक से संपर्क किया, उन्होंने वीरेंद्र मालव को सहायता के लिए तत्पर पाया। परिजनों की पीड़ा देख, मालव ने तुरंत अपनी प्लेटलेट्स दान करने की स्वीकृति दी।

एसडीपी चढ़ाने के तुरंत बाद मरीज की हालत में सुधार हुआ और चिकित्सकों ने बताया कि समय पर मिली मदद से मरीज की जान सुरक्षित हो गई। मरीज के पिता हेमराज नागर ने इस मानवता के कदम के लिए मालव का आभार व्यक्त किया।

वीरेंद्र मालव ने कहा, “आपातकाल में किसी की जान बचाने से बड़ा कोई कार्य नहीं है। मैं हमेशा तत्पर रहता हूँ और स्वैच्छिक डोनर अभियान को जीवंत बनाने में अपनी भूमिका निभाता हूँ।” ब्लड बैंक के स्टाफ ने भी उनके इस प्रयास की सराहना की और आगे सहयोग का संकल्प लिया।

यह घटना न केवल एसडीपी डोनेशन के महत्व को दर्शाती है, बल्कि यह दिखाती है कि थोड़ी सी जागरूकता और इंसानियत से कितनी ज़िंदगियाँ बचाई जा सकती हैं। कोटा में इस प्रकार के अभियान लगातार लोगों में संवेदनशीलता और समाजिक जिम्मेदारी की भावना जागृत कर रहे हैं।

Pratahkal Bureau

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