सांगोद में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने ग्रामीण विकास कार्यों की समीक्षा की
ऊर्जा मंत्री ने लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए मानसून से पहले खेतों के रास्ते दुरुस्त करने और सीसी सड़क की जगह इंटरलॉकिंग बनाने के निर्देश दिए।

पंचायत समिति सांगोद के सभागार में सोमवार को 'वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान' और ग्रामीण विकास कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर (केंद्र में)।
पंचायत समिति सांगोद के सभागार में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों तथा ग्राम विकास से जुड़े कार्मिकों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक लेते हुए ग्रामीण विकास कार्यों में लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया। बैठक में क्षेत्र के ग्रामीण विकास, संपर्क मार्गों के निर्माण, स्वच्छता तथा ‘वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान’ की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
मंत्री नागर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बारिश के मौसम से पहले सभी खेतों के दर्ज रास्तों को हर हाल में दुरुस्त किया जाए और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या बहानेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ग्राम पंचायत वार प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए उन गांवों पर कड़ी नाराजगी जताई, जहां विधायक कोष से स्वीकृत रास्तों पर अब तक ‘जीरो काम’ हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों के प्रशासक, सरपंच और ग्राम सेवक अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभाएं।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में धान की फसल होती है और बारिश के दौरान जलभराव से रास्ते बंद हो जाते हैं, ऐसे संवेदनशील स्थानों को तत्काल चिन्हित कर प्राथमिकता से कार्य शुरू किया जाए। मंत्री ने यह भी कहा कि निर्माण कार्यों में ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा ब्लैकलिस्टेड फर्मों को किसी भी नए कार्य का टेंडर न दिया जाए। नीति निर्धारण के तहत उन्होंने स्पष्ट किया कि अब गांवों में सीसी सड़क के स्थान पर केवल इंटरलॉकिंग सड़कें ही बनाई जाएंगी, जिनकी पूर्व टेस्टिंग अनिवार्य होगी।
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि खेतों के रास्तों को दुरुस्त करना सरकार का संकल्प है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को जनभावनाओं का ध्यान रखते हुए पारदर्शिता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए तथा ग्रामीण विकास और स्वच्छता कार्यों में लीपापोती करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
बैठक में ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन को लेकर भी मंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने प्रत्येक पंचायत में क्लस्टर आधारित कचरा प्रबंधन मॉडल लागू करने के निर्देश दिए, जिसके तहत सूखा, गीला तथा मेडिकल वेस्ट का अलग-अलग निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने रसोई के कचरे से कंपोस्ट खाद निर्माण हेतु प्लांट लगाने तथा बायोगैस उत्पादन की संभावनाओं पर कार्य करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कोई सफाई ठेकेदार कार्य में कोताही बरतता है तो उसे तत्काल नोटिस देकर सस्पेंड, टर्मिनेट और ब्लैकलिस्ट किया जाए।
उन्होंने प्रशासनिक जवाबदेही तय करते हुए यह भी घोषणा की कि बेहतर कार्य करने वाले ग्राम सेवकों को पारितोषिक दिया जाएगा, जबकि मुख्यालय पर न रुकने तथा लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों को सीधे चार्जशीट दी जाएगी।
‘वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान’ के तहत भूजल स्तर सुधारने के लिए गांवों में वैज्ञानिक पद्धति से सोखता गड्ढों के निर्माण पर जोर दिया गया, जिससे व्यर्थ बहने वाले पानी का पुनर्भरण सुनिश्चित हो सके। मंत्री ने पारंपरिक कुओं और बावड़ियों के जीर्णोद्धार तथा जल स्रोतों पर श्रमदान की भी अपील की।
बैठक में जिला प्रमुख मुकेश मेघवाल, प्रधान जयवीर सिंह अमृतकुआं, उप प्रधान ओम नागर अडूसा सहित जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, मंडल अध्यक्ष तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। पूरी बैठक में ग्रामीण विकास कार्यों में जवाबदेही, पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया।

Pratahkal Bureau
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