बच्चों में स्क्रीन टाइम और जंक फूड से स्वास्थ्य खतरों पर ध्यान देने की आवश्यकता: डॉ. नीलम मोहन ने दिया मार्गदर्शन
कोटा में भारतीय शिशु अकादमी द्वारा आयोजित बाल स्वास्थ्य जागरूकता सत्र में डॉ. नीलम मोहन ने बच्चों में स्क्रीन टाइम और जंक फूड के खतरों पर जोर देते हुए लिवर फेल्योर, मानसिक स्वास्थ्य और पोषण पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया। हाड़ौती के चिकित्सकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

कोटा। भारतीय शिशु अकादमी कोटा द्वारा बच्चों और किशोरों में बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आत्महत्या रोकथाम और स्वास्थ्य जागरूकता श्रृंखला के तीसरे विशेष सत्र का आयोजन हाड़ी रानी सर्किल स्थित आईएपी भवन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मेदांत अस्पताल, गुरुग्राम की राष्ट्रीय अध्यक्ष और लिवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. नीलम मोहन रही, जिन्होंने लिवर फेल्योर, इसके प्रारंभिक लक्षण, रोकथाम और लिवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सी.बी. दासगुप्ता ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से संगठन द्वारा लगातार बच्चों की बीमारियों और नवीनतम चिकित्सीय प्रबंधन पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल बच्चों के स्वास्थ्य और माता-पिता की जागरूकता बढ़ाने में अत्यंत प्रभावी साबित हो रही है।
अपने संबोधन में डॉ. नीलम मोहन ने देश में कुपोषण, एनीमिया और बच्चों के अत्यधिक मोबाइल उपयोग से उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं पर विशेष ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम से नींद संबंधी परेशानियां, तनाव, त्वचा रोग और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। साथ ही, जंक फूड की अधिकता बच्चों के लिए अभिशाप के समान है। डॉ. मोहन ने किशोरावस्था में पोषण, टीकाकरण, हार्मोनल बदलाव और मानसिक स्वास्थ्य पर नियमित कार्यशालाओं की आवश्यकता पर भी बल दिया।
इस अवसर पर स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत शिक्षकों और विद्यार्थियों को संतुलित पोषण, शारीरिक गतिविधियाँ, स्वास्थ्य एवं व्यक्तिगत सुरक्षा तथा मासिक धर्म स्वास्थ्य पर शिक्षित किया जा रहा है। डॉ. दासगुप्ता ने सरकार से अपील की कि इसे राष्ट्रीय योजनाओं में शामिल कर व्यापक जन अभियान के रूप में चलाया जाए। उन्होंने कहा कि बाल स्वास्थ्य सुधारना—सरकार, चिकित्सा शिक्षा संस्थान और समाज—सभी की साझा जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में हाड़ौती क्षेत्र के बारां, झालावाड़ और कोटा के चिकित्सकों को उनकी सेवा और उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। शामिल चिकित्सकों में डॉ. गौतम नागौरी, डॉ. एम.एल. कुलश्रेष्ठ, डॉ. उर्मिला कटियार, डॉ. जे.के. बरथूनिया, डॉ. निहाल खुबचंदानी, डॉ. आर.एस. गुप्ता, डॉ. लक्ष्मण गुप्ता, डॉ. नवनीत बगला और डॉ. आर.के. गुलाटी शामिल रहे।
अंत में भारतीय शिक्षा अकादमी के अध्यक्ष डॉ. कमल और सचिव डॉ. जसवंत महावर ने बताया कि कार्यक्रम में लगभग 80 शिशु रोग विशेषज्ञों ने भाग लेकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। सभी ने मुख्य अतिथि डॉ. नीलम मोहन और विशिष्ट अतिथि प्राचार्य डॉ. संगीता सक्सेना को प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस सत्र ने बच्चों के स्वास्थ्य जागरूकता अभियान में नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की।
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Pratahkal Bureau
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