कोटा में पूर्व विधायक हरीश शर्मा की पुण्यतिथि पर राजनीतिक शुचिता पर संगोष्ठी आयोजित
नागरिक चेतना मंच द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने राजनीति में नैतिक मूल्यों की आवश्यकता पर दिया बल।

कोटा के राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय सभागार में मंगलवार को पूर्व विधायक स्वर्गीय हरीश शर्मा की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा एवं विचार गोष्ठी के दौरान मंचासीन अतिथि और उपस्थित लोग।
नागरिक चेतना मंच, कोटा के तत्वावधान में पूर्व विधायक एवं युवा क्रांतिकारी छात्र नेता स्वर्गीय हरीश शर्मा की पुण्यतिथि पर मंगलवार को राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय सभागार, सीएडी ग्राउंड दादाबाड़ी रोड स्थित सभागार में श्रद्धांजलि सभा एवं विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में स्व. हरीश शर्मा के छात्र आंदोलन, जनसंघर्षों, राजनीतिक जीवन और सामाजिक सरोकारों को याद करते हुए राजनीति में शुचिता, जवाबदेही और जनहित आधारित व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
समन्वयक शशि प्रकाश गौत्तम ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ स्व. हरीश शर्मा के सार्वजनिक जीवन, छात्र राजनीति में उनके योगदान और सामाजिक सरोकारों से जुड़े प्रसंगों के स्मरण के साथ हुआ। समन्वयक पंकज मेहता ने बताया कि प्रथम सत्र में उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित संस्मरणों तथा संग्रहित विचारों की प्रस्तुति दी गई। वक्ताओं ने छात्र राजनीति और जनसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को विस्तार से याद किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईएसएस अधिकारी पी.सी. पवन ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त आईएसएस अधिकारी अमर सिंह उपस्थित रहे। संचालन शशि प्रकाश गौत्तम ने किया।
द्वितीय सत्र में आयोजित मुख्य व्याख्यान में कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने “राजनीतिक शुचिता : समय की आवश्यकता” विषय पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राजनीति में शुचिता का अर्थ ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों के पालन से है। वर्तमान समय में भ्रष्टाचार और अनैतिक आचरण ने राजनीति की छवि को प्रभावित किया है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों का आचरण समाज के लिए आदर्श होना चाहिए।
प्रो. सारस्वत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास तभी मजबूत होगा, जब राजनीति स्वच्छ, जवाबदेह और जनहित केंद्रित होगी। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, धनबल और बाहुबल पर नियंत्रण तथा त्वरित न्यायिक व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया। युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति को केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा और परिवर्तन के साधन के रूप में अपनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “देश को केवल नेता नहीं, बल्कि नीति और आचरण की आवश्यकता है। राजनीति गंदी नहीं होती, बल्कि उसमें आए गलत तत्व उसकी गरिमा को प्रभावित करते हैं। अब समय है कि राजनीति में शुचिता को पुनः प्रतिष्ठित किया जाए। देश को भाषण नहीं, आचरण चाहिए। देश को वाद नहीं, विवाद रहित विकास चाहिए।”
कार्यक्रम के अंत में समन्वयक पंकज मेहता ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर पूर्व आईएएस अधिकारी पी.सी. पवन और अमर सिंह सहित कई वक्ताओं ने स्व. हरीश शर्मा के जीवन, संघर्ष और जनसेवा पर प्रकाश डाला। अंता के पवन गोचर ने कविता पाठ किया।
इस अवसर पर कैलाश बाहेती, रामकुमार दाधीच, डॉ. अनिल शर्मा, किशन पाठक, डॉ. बनवारी जिंदल, गोविंद शर्मा, किशन पाठक, पवन गोचर, डॉ. एन.एन. शर्मा, यज्ञदत्त हाड़ा, रासबिहारी पारीक, कमल सिंह गहलोत, प्रद्युमन शर्मा सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
समन्वयक शशि प्रकाश गौत्तम ने स्व. हरीश शर्मा के छात्र आंदोलन और जनसंघर्षों को स्मरण करते हुए बताया कि वे हाड़ौती के क्रांतिकारी छात्र नेता रहे तथा लगातार तीन बार राजकीय महाविद्यालय, कोटा छात्रसंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। वर्ष 1972 में छात्रसंघ अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कोटा के उद्योगों में हाड़ौतीवासियों को 80 प्रतिशत रोजगार देने की मांग को लेकर ऐतिहासिक आंदोलन चलाया। आंदोलन के परिणामस्वरूप स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलने लगी।
इसी दौर में उन्होंने हाड़ौती विश्वविद्यालय की मांग को लेकर व्यापक जनआंदोलन का नेतृत्व किया। लगभग दो हजार छात्रों के मशाल जुलूस और व्यापक जनसमर्थन से यह आंदोलन ऐतिहासिक बना, जिसने आगे चलकर कोटा में विश्वविद्यालय स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।
पंकज मेहता ने बताया कि वर्ष 1974 में प्रत्यक्ष छात्रसंघ चुनाव शुरू होने पर अपार छात्र समर्थन से हरीश शर्मा छात्रसंघ अध्यक्ष बने और लोकनायक जयप्रकाश नारायण को कोटा आमंत्रित कर हाड़ौतीवासियों को उनके विचारों से परिचित कराया। आपातकाल के दौरान वर्ष 1975 में वे मीसा कानून के अंतर्गत 19 माह तक उदयपुर एवं भरतपुर जेल में निरुद्ध रहे। छात्र जीवन में बनी उनकी निर्भीक, दबंग और भ्रष्टाचार-अत्याचार के विरुद्ध संघर्षरत नेता की छवि जीवनभर अक्षुण्ण रही।
स्व. हरीश शर्मा वर्ष 1977 से 1990 तक लगातार तीन बार विधायक रहे। उन्होंने रामगंजमंडी से एक बार और खानपुर से दो बार जनता का प्रतिनिधित्व किया। उनके कार्यकाल में क्षेत्र में कराए गए विकास कार्य आज भी जनस्मृति में जीवंत हैं। गंभीर दुर्घटना और अस्वस्थता के बावजूद वे जीवनपर्यंत सामाजिक सरोकारों, भ्रष्टाचार एवं अत्याचार के विरुद्ध जनजागरण तथा चंबल नदी शुद्धिकरण और पर्यावरण संरक्षण अभियानों से जुड़े रहे।
स्व. हरीश शर्मा की पुण्यतिथि पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि सभा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक शुचिता, जनसंघर्ष और जनसेवा की उस विरासत को पुनः स्मरण कराने का माध्यम बना, जिसने हाड़ौती की राजनीति और छात्र आंदोलनों को नई दिशा दी।

Pratahkal Bureau
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