पितृ दोष को पितृ कृपा में परिवर्तित करने के उद्देश्य से हाड़ौती क्षेत्र में दशम पितृ तर्पण महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इस महायज्ञ की विशेषता यह रहेगी कि इसमें ‘स्वाहा’ नहीं, बल्कि ‘स्वधा’ की गूंज के साथ वेदोक्त विधि से पितरों का तर्पण किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार पितृ तर्पण महायज्ञ वह अनुष्ठान है जिसमें पुरुष प्रधान होता है। अकेला पुरुष भी इस पूजा में बैठ सकता है, जबकि महिला अकेले इस पूजा में नहीं बैठ सकती। जिन महिलाओं के पति का स्वर्गवास हो चुका है, वे अपने पुत्र अथवा परिवार के प्रतिनिधि पुरुष के माध्यम से यह पूजन करवा सकती हैं।

आयोजकों ने बताया कि पितरों की कृपा और पितृ दोष का प्रभाव व्यक्ति के दैनिक जीवन तथा जन्मपत्रिका में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। जिन लोगों की जन्मपत्रिका में पितृ दोष बनता है, उन्हें अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। महत्वपूर्ण कार्य बनते-बनते बिगड़ जाते हैं, व्यापार में अस्थिरता बनी रहती है, संतान सुख की प्राप्ति नहीं होती, वंश वृद्धि रुक जाती है तथा वैवाहिक एवं मांगलिक कार्यों में अवरोध उत्पन्न होते हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार पितृ दोष सूर्य ग्रह के राहु और केतु के प्रभाव अथवा युति से उत्पन्न होता है, जिससे व्यक्ति की प्रतिष्ठा और प्रगति प्रभावित होती है।

बताया गया कि कई बार धार्मिक अनुष्ठानों के बावजूद सफलता नहीं मिलती। यदि जन्मपत्रिका में ऐसा दुर्लभ योग बन जाए, घर में पितृ रोते हुए किसी मुखिया में प्रवेश कर संवाद करें अथवा पितरों के संकेत मिलने के बावजूद कार्य पूर्ण नहीं हों और करियर में लगातार समस्याएं आती रहें, तो इसे पितृ दोष का प्रभाव माना जाता है। इसका उल्लेख वृहत पाराशर शास्त्र और याज्ञवल्क्य स्मृति जैसे ग्रंथों में भी मिलता है। शास्त्रों के अनुसार जब तक शास्त्रोक्त रीति से तर्पण क्रिया और पूजन नहीं किया जाता, तब तक इसका प्रभाव बना रहता है। ऐसे में व्यक्ति विभिन्न अनुष्ठान करने के बाद भी अपेक्षित फल प्राप्त नहीं कर पाता।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ तर्पण के माध्यम से जल प्राप्त कर पितृ प्रसन्न होते हैं और इसके पश्चात सुख, शांति, वैभव, व्यापारिक स्थिरता तथा वंश वृद्धि जैसे शुभ फल प्राप्त होते हैं। आयोजकों ने बताया कि भगवान श्रीराम को भी वनवास काल में तर्पण कर्म करना पड़ा था। श्रद्धा और भाव के साथ किया गया तर्पण कर्म पितरों को प्रसन्न करने का सरल उपाय है, किंतु इसकी वेदोक्त विधि से सम्पन्नता आवश्यक है।

इसी उद्देश्य से श्री बालाजी अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष वास्तु शोध संस्थान द्वारा इस विस्तृत अभियान की शुरुआत जयपुर के गलता तीर्थ से की गई थी। अब तक नौ महायज्ञों का सफल आयोजन किया जा चुका है और अब दसवां महायज्ञ हाड़ौती क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है। यह दिव्य आयोजन पितृ दोष समाधान के लिए वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका है।

श्री रामलला अयोध्याजी सेवा समिति, अयोध्याधाम के अध्यक्ष, वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड होल्डर एवं विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. आचार्य राजानन्द शास्त्री ने बताया कि वे भामाशाह समाजसेवी होने के साथ-साथ ज्योतिषीय क्षेत्र की आईटी कंपनियों के सीईओ और फाउंडर भी हैं। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में भामाशाहों का आर्थिक सहयोग इसलिए नहीं लिया जाता क्योंकि विशेष रूप से पितरों का पूजन भामाशाहों के धन से करवाना शास्त्र सम्मत रूप से फलदायी नहीं माना गया है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में भी न्यूनतम खर्च में अधिकतम सनातन धर्म प्रेमियों को पितृ दोष से मुक्ति दिलाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि पूर्वज पितृ प्रसन्न होकर वर्तमान पीढ़ी को सुख, सौभाग्य, व्यापार वृद्धि और वंश वृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें।

उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति पितृ ऋण और मातृ ऋण से मुक्त नहीं होता, तब तक जीवन में अनेक बाधाएं बनी रहती हैं। इसी विचार के साथ हाड़ौती क्षेत्र के लिए इस दशम महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन में शुद्ध सामग्री, शुद्ध गंगाजल तथा मथुराधीश जी की पावन धरा पर बहने वाली चंबल नदी के तट का विशेष महत्व रहेगा। चंबल के उन घाटों का भी उल्लेख किया गया, जहां भगवान परशुराम ने तपस्या की तथा पितृ तर्पण किया था।

कार्यक्रम के पोस्टर विमोचन अवसर पर सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने अधिकाधिक संख्या में भागीदारी की अपील की। संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य गणपति मिश्र ने बताया कि अधिक मास की अमावस्या एक विशेष पर्व है। कार्यक्रम को वेदोक्त रीति से सम्पन्न कराने के लिए 250 विद्वान पंडित ब्रह्म गायत्री जप, गीता पाठ और वेद मंत्रों का पाठ करेंगे।

सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने इस आयोजन के लिए डॉ. आचार्य राजानन्द शास्त्री का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. आचार्य राजानन्द शास्त्री, जगमोहन जी, लोकेश जी, भामाशाह मंडी कुंज बिहारी जी, विशाल शर्मा, गणपति जी मिश्र, मुख्य आचार्य, व्यापार महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन, महासचिव अशोक महेश्वरी, अनिल बड़ौदा, नामदेव समाज के लक्ष्मी चंद्र अजमेरा, रामचरण अजमेरा, भाजपा नेता गोविंद शर्मा, ज्योतिष ब्रजराज जी गौतम, जगमोहन जी गौतम, राजेंद्र मोहन जी गौतम, प्रवीण पंचोली, मनोज शर्मा, सत्यनारायण शर्मा, रोहित गौतम, लोकेश गौतम, बनवारी गौतम, अनिल गौतम, श्याम बिहारी शर्मा, रमेश चंद्र शर्मा, हनुमान शर्मा, देवेंद्र गौतम, अनिल तिवारी, हेमेंद्र शर्मा, सावित्री गौतम, जया शर्मा, कमलेश शर्मा, वंदना शर्मा, मीना गौतम, मीरा गौतम, राज श्री गौतम सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

पितृ दोष निवारण और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा को समर्पित यह दशम पितृ तर्पण महायज्ञ हाड़ौती क्षेत्र में एक व्यापक धार्मिक आयोजन के रूप में आयोजित होगा, जिससे हजारों श्रद्धालुओं को वेदोक्त विधि से पितृ तर्पण का अवसर प्राप्त होगा।

Pratahkal Bureau

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