कोटा में स्वामी विवेकानंद जयंती पर वन एवं वन्यजीव संरक्षण पखवाड़े का भव्य शंखनाद
कोटा में स्वामी विवेकानंद जयंती पर शिक्षा सहकारी और स्काउट गाइड द्वारा 'वन एवं वन्यजीव संरक्षण पखवाड़े' का शुभारंभ किया गया। देवेंद्र गौतम और प्रकाश जायसवाल के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में वन्यजीवों की सुरक्षा, पर्यावरण संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लिया गया। 30 जनवरी तक चलने वाले इस अभियान में रैलियों और विभिन्न प्रतियोगिताओं के जरिए जनजागरण किया जाएगा।

कोटा, 12 जनवरी। राजस्थान की शैक्षणिक नगरी कोटा में आज पर्यावरण चेतना और जीव दया का एक अनूठा संगम देखने को मिला। स्वामी विवेकानंद जयंती के पावन अवसर पर शिक्षा विभाग कर्मचारी गण सहकारी सभा 696 आर कोटा तथा राजस्थान राज्य भारत स्काउट गाइड स्थानीय संघ कोटा दक्षिण के संयुक्त तत्वावधान में 'वन एवं वन्यजीव संरक्षण पखवाड़े' का विधिवत आगाज़ किया गया। इस आयोजन ने न केवल प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराया, बल्कि उपस्थित जनसमूह को वन्यजीवों और जंगलों को बचाने के अटूट संकल्प से भी बांध दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित एसोसिएट एनसीसी ऑफिसर देवेंद्र गौतम ने अपने संबोधन में संरक्षण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वन्यजीव संरक्षण महज एक गतिविधि नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग का एक आधार स्तंभ है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मनुष्य और पशु तभी सुखी रह सकते हैं जब वे प्राकृतिक दुनिया के साथ पूर्ण सामंजस्य बिठाकर रहें। श्री गौतम ने आह्वान किया कि संरक्षण के प्रयासों से ही संसाधनों का निष्पक्ष और समान वितरण संभव है, जिससे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शिक्षा सहकारी के अध्यक्ष एवं स्काउट गाइड के जिला प्रधान प्रकाश जायसवाल ने वर्तमान पारिस्थितिक संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि वन्यजीवों की संख्या में आती तीव्र गिरावट और प्रजातियों का विलुप्त होना भविष्य के लिए एक खतरे की घंटी है। श्री जायसवाल ने समाधान की राह दिखाते हुए कहा कि आज वनों की कटाई पर पूर्ण विराम लगाने, अवैध शिकार के विरुद्ध कड़े कदम उठाने और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित क्षेत्र घोषित करने की नितांत आवश्यकता है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में कमलेश नाथ योगी एवं अंतिमा महावर ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से उत्साहवर्धन किया।
आगामी रूपरेखा साझा करते हुए श्री जायसवाल ने बताया कि 12 जनवरी से 30 जनवरी तक चलने वाले इस पखवाड़े के दौरान जन-जागरूकता के लिए विविध कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इसमें वन्यजीवों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था से लेकर पैदल हाइक, साइकिल रैली, वन भ्रमण और जनजागरण रैलियाँ शामिल हैं। साथ ही, युवाओं और विद्यार्थियों को प्रकृति से जोड़ने के लिए प्रश्नोत्तरी, निबंध लेखन, स्लोगन निर्माण, खेलकूद, 'वनस्पतियों एवं वन्य जीवों को जानो' सत्र, चित्रकला और भाषण जैसी प्रतिस्पर्धात्मक गतिविधियाँ भी संचालित की जाएंगी। यह अभियान समाज में एक सकारात्मक संदेश प्रसारित करने के साथ-साथ प्रकृति और मानव के बीच के पुराने रिश्ते को पुनः जीवंत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा।

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