कोटा में राज्यपाल हरीभाऊ बागड़े का शंखनाद: 'बौद्धिक और मानसिक क्षमता के बल पर विश्व का नेतृत्व करेगा भारत'
कोटा में स्वामी विवेकानंद जयंती पर आयोजित सेवा संगम समारोह में राज्यपाल हरीभाऊ बागड़े ने 31 समाजसेवी संस्थाओं को सम्मानित किया। राज्यपाल ने भारत को बौद्धिक और आध्यात्मिक क्षमता के बल पर विश्व का नंबर एक देश बनाने का आह्वान करते हुए विकसित भारत @2047 और अंतिम व्यक्ति के उत्थान पर बल दिया।

कोटा। शिक्षा की नगरी कोटा के श्रीनाथपुरम स्थित शिवज्योति स्कूल के सभागार में सोमवार को एक आध्यात्मिक और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत भव्य दृश्य देखने को मिला। अवसर था स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती पर आयोजित 'सेवा संगम सम्मान समारोह' का, जहाँ राजस्थान के राज्यपाल हरीभाऊ बागड़े ने अपने ओजस्वी विचारों से भविष्य के भारत की रूपरेखा प्रस्तुत की। भारत विकास परिषद कोटा महानगर द्वारा आयोजित इस गरिमामयी समारोह में राज्यपाल ने सेवा क्षेत्र में उत्कृष्ट और निस्वार्थ योगदान देने वाली शहर की 31 प्रमुख समाजसेवी संस्थाओं को सम्मानित किया। अपने संबोधन में राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि भारत की असली ताकत उसकी समृद्ध संस्कृति, सभ्यता और आध्यात्मिक विरासत में निहित है और इसी के बल पर देश एक बार फिर विश्व में प्रथम स्थान प्राप्त करेगा।
समारोह की शुरुआत करते हुए राज्यपाल बागड़े ने स्वामी विवेकानंद के शिकागो व्याख्यान का उल्लेख करते हुए उनके दूरगामी दृष्टिकोण को वर्तमान भारत की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि मदद का स्वभाव और नैतिकता ही भारतीय समाज की असली शक्ति है। राज्यपाल ने युवाओं को एकाग्रता और सकारात्मक सोच का मंत्र देते हुए कहा कि नकारात्मकता का त्याग कर हमें समावेशी और सार्वभौमिक भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने अग्निवीर योजना का पुरजोर समर्थन करते हुए इसे राष्ट्रहित में बताया और इजरायल जैसे देशों का उदाहरण दिया जहाँ सैन्य सेवा अनिवार्य है। विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को लेकर उन्होंने जोर दिया कि जब तक विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुँचता, तब तक राष्ट्र की समृद्धि अधूरी है। साथ ही, उन्होंने पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे अनुचित ठहराया और 'मानव सेवा ही माधव सेवा' के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय सह संपर्क प्रमुख योगेंद्र जी ने आधुनिक पीढ़ी में संस्कारों के अभाव और बिखरते परिवारों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बल दिया कि हमें केवल अधिकारों की मांग नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपने कर्तव्यों और उत्तरदायित्वों को भी समझना होगा। उन्होंने सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी जीवन शैली को अपनाने पर जोर देते हुए समग्र परिवर्तन की आवश्यकता प्रतिपादित की। परिषद के क्षेत्रीय संयोजक किशन पाठक ने जानकारी दी कि कोटा में सक्रिय सैकड़ों संस्थाओं में से केवल उन 31 संस्थाओं का चयन किया गया जो पूर्णतः निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में जुटी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे सम्मान समारोहों से समाज सेवा की ऊर्जा का संचार होगा और प्रधानमंत्री के विकसित भारत के सपने को पंख मिलेंगे।
इस भव्य कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत विकास परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष अरविंद गोयल ने की, जिन्होंने राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका को रेखांकित किया। मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में क्षेत्रीय संयोजक संस्कार किशन पाठक, प्रांतीय महासचिव हिमांशु चतुर्वेदी और शिक्षाविद् मनोज जैन उपस्थित रहे। समारोह का कुशल संचालन कार्यक्रम संयोजक रवि प्रकाश विजय ने किया और आगत अतिथियों का शाब्दिक स्वागत कोटा महानगर समन्वयक रोहित विजयवर्गीय ने किया।
समारोह के समापन पर प्रांतीय महासचिव हिमांशु चतुर्वेदी ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जिला कलेक्टर पीयूष समारिया, पुलिस अधीक्षक कोटा शहर तेजस्विनी गौतम, आरएसएस के कोटा महानगर संघचालक गोपाल गर्ग, कुलगुरु बी.पी. सारस्वत, निमित्त रंजन चौधरी, बी.एल. वर्मा, उपाध्यक्ष विजय सिंह और महेंद्र सिंहवाल सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। यह आयोजन न केवल सेवा का सम्मान था, बल्कि स्वामी विवेकानंद के विचारों के माध्यम से राष्ट्र पुनर्निर्माण का एक संकल्प भी बन गया।

