18 लाख के सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़ वैराग्य की राह पर चले IIT इंजीनियर गौरव जैन
राजस्थान के जूनिया गांव के 24 वर्षीय गौरव जैन ने गुरुग्राम की बहुराष्ट्रीय कंपनी में 18 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर वैराग्य का मार्ग चुना। जानिए उनके धार्मिक संस्कारों, आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत और कोटा में हुई गोद भराई की रस्म की पूरी कहानी।

राजस्थान के कोटा में दीक्षार्थी गौरव भैया जी के आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत संकल्प के उपलक्ष्य में आयोजित गोद भराई एवं आहार चर्या कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जैन समाज के लोग और परिजन।
राजस्थान के अजमेर जिले में केकड़ी के निकट स्थित जूनिया गांव के 24 वर्षीय गौरव जैन ने आकर्षक नौकरी और सांसारिक जीवन के बजाय वैराग्य का मार्ग चुनने का संकल्प लिया है। गुरुग्राम की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में इंजीनियर के पद पर कार्यरत गौरव लगभग 18 लाख रुपये के वार्षिक वेतन पैकेज पर काम कर रहे थे। करीब 16 महीने की नौकरी के बाद उन्होंने आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ने का निर्णय लिया। आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत धारण कर वे निर्यापकाचार्य पूज्य 108 श्री सुधासागर जी महाराज के संघ में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनके इस निर्णय की जैन समाज में चर्चा हो रही है।
जूनिया गांव पहले भी संयम का मार्ग अपनाने वाले साधकों की जन्मभूमि रहा है। गांव के सात अन्य लोगों ने पूर्व में विभिन्न मुनि संघों में शामिल होकर संयम का मार्ग अपनाया था। गौरव जैन के निर्णय के बाद उनके परिवार और गांव में आध्यात्मिक जीवन को लेकर चर्चा है।
गौरव जैन, राकेश जी जैन के दो बच्चों में बड़े पुत्र हैं। बचपन से ही उन्हें धार्मिक संस्कार मिले। पढ़ाई में मेधावी होने के साथ उनका स्वभाव हंसमुख, मिलनसार और सहज रहा है। इसी कारण वे परिवार और गांव में सभी के प्रिय रहे। बचपन से ही उनकी धर्म के प्रति विशेष रुचि थी।
गौरव का ननिहाल केकड़ी के निकट गुलगांव में है। वर्ष 2015 में जब पूज्य मुनिपुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज ने गुणोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र, गुलगांव की नींव रखी, तब गौरव को पहली बार गुरुदेव के दर्शन करने का अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने गुरुदेव को अपना आध्यात्मिक मार्गदर्शक मान लिया। धीरे-धीरे प्रतिदिन प्रवचन सुनना और जिज्ञासा समाधान का श्रवण करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। गुरुदेव के प्रवचनों से धर्म के प्रति उनकी श्रद्धा और दृढ़ होती गई।
उच्च शिक्षा के लिए जयपुर के प्रताप नगर में रहने के दौरान भी गौरव ने अपनी धार्मिक दिनचर्या जारी रखी। वे प्रतिदिन साइकिल से श्री संघी जी मंदिर पहुंचकर देवदर्शन और अभिषेक करते थे। इसके साथ ही शुद्ध एवं सात्त्विक भोजन के नियम का पालन भी करते रहे। पढ़ाई और करियर की व्यस्तताओं के बीच उनकी धार्मिक निष्ठा बनी रही।
वर्ष 2022 में गौरव को एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी मिली। अच्छी शिक्षा, प्रतिष्ठित कंपनी में रोजगार और आकर्षक वेतन से परिवार को उनके उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद थी। समय बीतने के साथ परिवार और रिश्तेदारों में उनके विवाह को लेकर चर्चाएं शुरू हुईं, लेकिन इस दौरान गौरव के मन में वैराग्य का भाव और प्रबल हो चुका था। उन्होंने विवाह के प्रस्तावों से दूरी बनाकर आध्यात्मिक संकल्प को प्राथमिकता दी। आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत धारण कर धर्म और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ने की उनकी इच्छा लगातार दृढ़ होती गई।
पिछले माह पर्युषण पर्व से पहले गौरव इंदौर पहुंचे। वहां उन्होंने पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के समक्ष आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत धारण करने और संघ में रहकर आध्यात्मिक जीवन बिताने की भावना व्यक्त की। गुरुदेव ने उनकी बात सुनने के बाद परिवार को साथ लाने के लिए कहा। इसके बाद गौरव गुरुग्राम लौट गए।
हालांकि, उनका वैराग्य का संकल्प बना रहा। पर्युषण पर्व के बाद वे अपने गांव जूनिया जाने के बजाय दोबारा इंदौर पहुंचे और गुरुदेव के चरणों में अपनी भावना व्यक्त की। उन्होंने अपने परिवार को भी इंदौर बुला लिया।
इंदौर में परिवारजनों ने गौरव को सांसारिक जीवन अपनाने के लिए समझाने का प्रयास किया। माता-पिता की आंखों से बहते आंसुओं और परिजनों की भावुक मनुहार के बावजूद उन्होंने अपना निर्णय नहीं बदला। गौरव ने आजीवन ब्रह्मचर्य और आध्यात्मिक साधना के मार्ग पर आगे बढ़ने की इच्छा दोहराई।
जैन धर्म में वैराग्य को आत्मकल्याण और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। गौरव का निर्णय उनके वर्षों से विकसित धार्मिक संस्कारों, गुरुदेव के प्रति श्रद्धा और साधना के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
इसी क्रम में 24 अक्टूबर, शनिवार को कोटा में दीक्षार्थी गौरव भैया जी के सम्मान में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जैन समाज के यतींद्र जैन ने बताया कि गौरव की बुआ के आवास तथा श्री पद्मप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, बालिता रोड के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ‘मेहरू वालों’ के निवास पर जैन समाज के गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में आहार चर्या और गोद भराई की रस्म संपन्न हुई।
इस अवसर पर समाजजनों ने श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ दीक्षार्थी गौरव भैया जी की गोद भराई की। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक उत्साह और आध्यात्मिक उल्लास का माहौल रहा।
गौरव जैन का जीवन सांसारिक उपलब्धियों से आध्यात्मिक साधना की ओर बढ़ते उनके सफर को दर्शाता है। लगभग 18 लाख रुपये के वार्षिक वेतन पैकेज वाली नौकरी छोड़कर संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने के उनके संकल्प से जूनिया गांव सहित जैन समाज में चर्चा है। अब उनके आगामी आध्यात्मिक पड़ाव पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

Bhagvati Medatwal, Kota
नाम: भगवती मेड़तवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)
कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र
बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय
परिचय
भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।
