कोटा में निःशुल्क आरओपी जांच शिविर: असमय जन्मे शिशुओं की दृष्टि बचाने की पहल
कोटा में विश्व प्रीमैच्योरिटी दिवस पर सरोया आई हॉस्पिटल में निःशुल्क आरओपी जांच शिविर का आयोजन। डॉ. गरिमा लखोटिया और डॉ. शायना सरोरा ने 64 आंखों की जांच कर समय पर स्क्रीनिंग के महत्व पर जोर दिया। असमय जन्मे शिशुओं की दृष्टि बचाने हेतु यह पहल बेहद महत्वपूर्ण है।

कोटा। विश्व प्रीमैच्योरिटी दिवस (17 नवंबर) के अवसर पर 14 नवंबर को सरोया आई हॉस्पिटल में असमय जन्मे शिशुओं में होने वाली गंभीर नेत्र बीमारी रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी (आरओपी) के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु निःशुल्क नेत्र जांच शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर में हाड़ौती की प्रथम और एकमात्र प्रशिक्षित आरओपी विशेषज्ञ डॉ. गरिमा लखोटिया ने अस्पताल की रेटिना विशेषज्ञ डॉ. शायना सरोया के सहयोग से कुल 64 आंखों की जांच की और समय पर स्क्रीनिंग के महत्व पर जोर दिया।
डॉ. शायना सरोया ने बताया कि आरओपी असमय जन्मे शिशुओं में दृष्टि हानि का प्रमुख कारण है, लेकिन समय पर जांच एवं उपचार से अधिकांश बच्चों की रोशनी बचाई जा सकती है। डॉ. गरिमा लखोटिया ने अब तक 3,500 से अधिक शिशुओं को आरओपी जनित अंधता से बचाया है। हर वर्ष लगभग 500 असमय जन्मे शिशु जांच के लिए आते हैं, जिनमें 80 प्रतिशत में आरओपी की किसी न किसी अवस्था का पता चलता है। जबकि अधिकांश मामलों में शारीरिक समस्याओं जैसे रक्त या प्लेटलेट की कमी, कम वजन, संक्रमण आदि का उपचार करने पर स्थिति सुधर जाती है, लगभग 20 प्रतिशत मामलों में अतिरिक्त नेत्र उपचार की आवश्यकता पड़ती है।
पिछले वर्ष डॉ. गरिमा ने 18 आंखों में लेज़र उपचार और 4 आंखों में विशेष औषधि के इंजेक्शन के माध्यम से दृष्टि बचाई। वहीं, 6 शिशु ऐसी स्थिति में पहुंचे कि उनकी 12 आंखों में आरओपी का अंतिम चरण पाया गया, जिसमें उपचार संभव नहीं था। डॉ. शायना सरोया ने कहा कि हाल के वर्षों में सामान्य वजन वाले एवं आठ महीने के बाद जन्मे शिशुओं में भी गंभीर आरओपी के मामले सामने आ रहे हैं, जो चिकित्सकों के लिए चिंता का विषय है।
सरोया आई हॉस्पिटल एंड रेटिना केयर सेंटर के निदेशक डॉ. त्रिलोकेन्द्र सरोया ने बताया कि इस वर्ष अस्पताल स्थापना के 10 वर्ष पूरे कर रहा है। पिछले एक दशक से यह अस्पताल हाड़ौती एवं आसपास के क्षेत्रों में आरओपी की जांच और उपचार सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराता रहा है। अस्पताल का उद्देश्य है कि कोई भी असमय जन्मा शिशु दृष्टिहीन न रहे।
अस्पताल प्रबंधक डॉ. अरुण सरोरा ने बताया कि इसी अभियान के तहत 15 नवंबर को प्रातः 7 बजे श्रीनाथपुरम स्टेडियम में “वन माइल ऑफ लिटिल स्माइल” नामक जनजागरूकता वॉक आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में लोगों को शिशुओं की नेत्र सुरक्षा के महत्व से अवगत कराया जाएगा और युवाओं को टी-शर्ट व कैप वितरित किए जाएंगे। यह अभियान आने वाले समय में हाड़ौती के विभिन्न नवजात गहन चिकित्सा कक्ष (एनआईसीयू) और बाल चिकित्सालयों में भी जारी रहेगा।
आरओपी क्या है?
रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी (ROP) असमय जन्मे शिशुओं की आंखों की रक्त वाहिकाओं के असामान्य विकास से होने वाली स्थिति है, जिससे स्थायी दृष्टि हानि हो सकती है। जन्म के 3–4 सप्ताह के भीतर समय पर जांच कर लेने पर अधिकांश मामलों में अंधता रोकी जा सकती है।
- कोटा आरओपी जांच शिविर 2025Saroya Eye Hospital ROP camp Kotaअसमय जन्मे शिशु दृष्टि बचानेPremature babies eye screening KotaROP free eye checkup camp Kotaडॉ गरिमा लखोटिया आरओपी विशेषज्ञpremature baby retinal disease treatmentROP screening importance in Kotaसरोया आई हॉस्पिटल retina careवन माइल ऑफ लिटिल स्माइल awareness walkpremature babies eye health awarenessROP laser treatment Kotapremature infant vision protectionKota NICU ROP screeningpremature baby retina examination

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
