उर्वरक कीमतों में वृद्धि और गेहूं खरीद पर किसान महासभा ने जताई चिंता
भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा ने उर्वरक के दाम बढ़ने पर विरोध जताया और समर्थन मूल्य पर गेहूं की पूर्ण खरीद सुनिश्चित करने की मांग की है।

भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे, जो उर्वरक कीमतों में वृद्धि और गेहूं खरीद की समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
कोटा। भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने एनपीके, पोटाश और मिश्रित उर्वरकों की कीमतों में की गई भारी वृद्धि की तीव्र निंदा करते हुए इसे अन्नदाताओं पर चौतरफा मार करार दिया है। मनोज दुबे ने कहा कि खाद की बढ़ती कीमतों ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। एक तरफ भाजपा सरकार किसानों की आय दोगुनी से आठ गुनी करने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर खरीफ सीजन के प्रारंभ से पूर्व ही खाद के दामों में भारी बढ़ोतरी कर किसानों को आर्थिक संकट में धकेला जा रहा है। एनपीके खाद की प्रति बोरी कीमतों में 400 रुपये से लेकर 550 रुपये तक की वृद्धि को किसान विरोधी निर्णय बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ लाद दिया है।
मनोज दुबे ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसान पहले से ही महंगे बीज, डीजल, बिजली और प्रतिकूल मौसम की मार झेल रहा है, और अब खाद की बढ़ी हुई कीमतों ने खेती की लागत को और अधिक बढ़ा दिया है। उन्होंने सरकार से तत्काल इस निर्णय पर पुनर्विचार कर खाद की बढ़ी हुई कीमतें वापस लेने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लगातार महंगाई का बोझ डालकर कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर करने पर आमादा है, जो बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है।
इसी क्रम में, मनोज दुबे ने समर्थन मूल्य पर गेहूं की संपूर्ण खरीद सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। उन्होंने सरकार द्वारा गेहूं खरीद की अवधि में की गई मात्र 7 दिवस की बढ़ोतरी को अपर्याप्त बताते हुए इसकी समय सीमा को 30 जून तक बढ़ाने और किसानों को पर्याप्त मात्रा में बारदाना उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की पूर्व निर्धारित अंतिम तिथि 31 मई थी, जिसे अब मात्र एक सप्ताह के लिए बढ़ाया गया है, जबकि अभी भी लाखों किसानों के गेहूं की तुलाई शेष है। यदि खरीद की समय सीमा नहीं बढ़ाई गई, तो किसान अपनी खून-पसीने की फसल को व्यापारियों को औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होंगे।
अंत में मनोज दुबे ने कहा कि निर्धारित तिथि समाप्त होने के बाद किसान गहरी चिंता और परेशानी में हैं। सरकार के प्रतिनिधियों ने किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं का एक-एक दाना खरीदने का वादा किया था, किंतु अब पूर्ण खरीद न होने के कारण और समय सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर किसानों को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जो घोर निंदनीय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को किसानों के गेहूं की समर्थन मूल्य पर पूरी खरीद सुनिश्चित करनी चाहिए।

