आईएपी कोटा की शिकायत पर कुन्हाड़ी थाना पुलिस ने कृष्ण कुमार और देवेंद्र वर्मा को पकड़ा, प्रार्थी का वैध लाइसेंस नंबर चुराकर चला रहे थे सेंटर।

चिकित्सा क्षेत्र में शुद्धता बनाए रखने और आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए द इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स (IAP), जिला शाखा - कोटा द्वारा शुरू किया गया अभियान अब धरातल पर एक बड़े और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। कोटा जिले में फिजियोथेरेपी के नाम पर अवैध और फर्जी तरीके से क्लीनिक संचालित कर मासूम मरीजों के स्वास्थ्य के साथ सरेआम खिलवाड़ करने वाले दो बड़े जालसाजों को पुलिस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। इस बड़ी और सख्त कार्रवाई के पीछे आईएपी कोटा की पुरजोर कोशिशें और सजगता पूरी तरह रंग लाई हैं, जिसके बाद कुन्हाड़ी थाना पुलिस ने दोनों फर्जी फिजियोथेरेपिस्टों को हिरासत में लिया है और आज इन्हें माननीय एडीएम सिटी (ADM City) के समक्ष पेश किया जाएगा।

इस पूरे सनसनीखेज मामले का विवरण और पुलिस कार्रवाई की परतें खोलती कहानी कोटा के कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र स्थित सुवालका रिद्धि सिद्धि विहार से जुड़ी है। यहाँ अभियुक्तों द्वारा "स्पाइन फिजियोथेरेपी चिकित्सा सेंटर" का बड़ा सा बोर्ड लगाकर अवैध रूप से भोले-भाले लोगों को इलाज का झांसा दिया जा रहा था। आईएपी कोटा की सजगता और प्रार्थी The IAP Branch Kota की शिकायत परिवाद संख्या 936 पर गहन अनुसंधान करते हुए कुन्हाड़ी थाना पुलिस ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। इस पूरे फर्जीवाड़े के मुख्य अभियुक्त कृष्ण कुमार उर्फ कृष्ण मुरारी और उसके सहयोगी देवेंद्र कुमार वर्मा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पकड़े गए अभियुक्त द्वारा प्रार्थी के वैध लाइसेंस नंबर का अवैध व गैर-कानूनी तरीके से इस्तेमाल कर स्वयं को फर्जी रूप से फिजियोथेरेपिस्ट बताया जा रहा था। इस गंभीर कृत्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318, 319, 336, 340 एवं 66(सी) आई.टी. एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

इस पूरे मामले में आज आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान एक अभूतपूर्व और बेहद चौंकाने वाला घटनाक्रम देखने को मिला, जहाँ पुलिस हिरासत में लिए गए दोनों अभियुक्त भी एसोसिएशन और पुलिस की मौजूदगी में वहाँ मौजूद रहे। मीडिया और जनता के सामने कानून के शिकंजे में फंसे दोनों अभियुक्तों ने हाथ जोड़कर और रोते हुए अपनी गंभीर गलती स्वीकार ली। उन्होंने भरे गले से कहा कि मुझे माफ कर दो और सार्वजनिक रूप से शपथ ली कि वे आगे से कभी भी जीवन में फिजियोथेरेपी का कार्य या किसी भी मरीज के यहाँ होम विजिट (Home Visit) नहीं करेंगे, और न ही कभी किसी क्लीनिक का संचालन करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने दूसरों को भी यह कड़ी नसीहत दी कि वे बिना उचित और प्रामाणिक डिग्री के चिकित्सा क्षेत्र में काम करने की भूल कतई न करें।

प्रेस वार्ता के दौरान आईएपी कोटा ने अखबारों और निर्देशिकाओं (Directories) में धड़ल्ले से छप रहे विभिन्न भ्रामक विज्ञापनों का हवाला देते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की, जिसमें एक्यूप्रेशर, मैग्नेट थेरेपी या न्यूरोथेरेपी के नाम पर फिजियोथेरेपी से मिलते-जुलते भ्रामक दावे कर जनता को ठगा जा रहा है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि हम कोटा के माननीय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO साहब) से यह पुरजोर उम्मीद और अपील करते हैं कि जिले में जितने भी इस तरह के भ्रामक प्रचार करने वाले, बिना रजिस्ट्रेशन के और सरकार के कानूनी दायरे में न आने वाले अवैध क्लीनिक और थेरेपी सेंटर चल रहे हैं, उन पर तुरंत संज्ञान लेकर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए और उन्हें हमेशा के लिए बंद किया जाए।

इस अभियान को निर्णायक मोड़ पर ले जाने के लिए आईएपी कोटा के जनरल सेक्रेटरी डॉ. जसविंदर सिंह और अभियान प्रमुख डॉ. दीपक कुमार यादव ने आम जनता और दर्शकों से सहयोग की विशेष अपील की है। उन्होंने सचेत किया कि जनता हमेशा अपनी पूर्ण जांच करने के बाद डिग्री देखकर ही अपना इलाज कराए। केवल और केवल उसी फिजियोथेरेपिस्ट से उपचार लें जिसके पास वैध B.PT डिग्री हो और जो NCAHP एक्ट 2021 के सरकारी नियमों तथा कार्यों को करने के लिए 'द इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स' (IAP) का रजिस्ट्रेशन रखता हो, क्योंकि कानूनों के दायरे से पूरी तरह बंधा होना आवश्यक है। आईएपी, कोटा के अध्यक्ष ने यह भी बताया कि आजकल शहर में प्रथम, द्वितीय व तृतीय वर्ष के छात्र भी फिजियोथेरेपी की सेवाऐं घर-घर जाकर दे रहे हैं जो ना तो इसके लिये अधिकृत हैं और ना ही योग्य हैं, अतः ऐसे व्यक्तियों को भी ढूंढकर उचित कार्यवाही की जायेगी। यदि आपके आस-पास कोई भी बिना डिग्री या बिना काउंसिल रजिस्ट्रेशन के अवैध प्रैक्टिस करता हुआ दिखाई दे, तो इसकी तुरंत सूचना अपने क्षेत्र के वैध रजिस्ट्रेशन नंबर वाले प्रामाणिक असली फिजियो को दें ताकि एसोसिएशन कड़ा एक्शन ले सके। इसके अलावा किसी भी प्रकार के संदिग्ध या फर्जी सेंटर की शिकायत सरकार की आधिकारिक मेडिकल हेल्पलाइन 104 डायल करके दर्ज कराएं या सीधे नजदीकी पुलिस थाने में इसकी शिकायत करें, ताकि ऐसे अपराधियों को तुरंत जेल भेजा जा सके। इस पूरे अभियान को द इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स (IAP), कोटा डिस्ट्रिक्ट ब्रांच के संरक्षक (Patron) डॉ. हर्ष मोहन राजदीप (PT), कन्वीनर (Convener) डॉ. दिनेश कुमार शर्मा (PT), जनरल सेक्रेटरी (General Secretary) डॉ. जसविंदर सिंह (PT), ट्रेजरर (Treasurer) डॉ. राहिल इकबाल (PT), जॉइंट सेक्रेटरी (Joint Secretary) डॉ. अफरोज़ पठान (PT), जॉइंट ट्रेजरर (Joint Treasurer) डॉ. सुबोध सोनी, सदस्य डॉ. सुभाष चंद्र (PT), डॉ. दीपेंद्र राठौड़ (PT), डॉ. देवराज बैरवा (PT), डॉ. मृदुला चौहान (PT), डॉ. मोहम्मद आफताब (PT) तथा क्षेत्रीय प्रतिनिधि (Regional Representatives - हाड़ौती अंचल) झालावाड़ से डॉ. मोहित मेहरा (PT), बारां से डॉ. महेश तिवारी (PT), बूंदी से डॉ. जुनैद खान (PT) और रावतभाटा से डॉ. त्रिशला मेनन (PT) का पूर्ण समर्थन और नेतृत्व प्राप्त है, जिसका समाज पर एक गहरा और दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।

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