भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर नकली खाद, नकली बीज और नकली पेस्टिसाइड पर पूर्ण रूप से रोक लगाने के लिए संसद में कड़ा कानून लाने की मांग की है।

मनोज दुबे ने नकली खाद, बीज और नकली पेस्टिसाइड को किसानों की सबसे बड़ी समस्या बताते हुए इस पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नकली खाद, बीज और नकली पेस्टिसाइड केवल भारी भ्रष्टाचार का मामला नहीं है, बल्कि यह देश के अन्नदाता के साथ किया गया विश्वासघात भी है। इसके दोषियों को सख्त सजा मिलना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि नकली खाद एवं नकली कीटनाशक बनाने में निजी कंपनियों के साथ-साथ सरकारी कंपनियों और सहकारी समितियों का भी शामिल होना गंभीर चिंता का विषय है। आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ 2025-26 में खाद के 556, बीज के 187 और कीटनाशकों के 128 नमूने, यानी कुल 871 नमूने जांच में फेल हुए। पिछले तीन वर्षों में 2,220 नमूने गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए। सबसे गंभीर बात यह है कि इनमें सरकारी सहकारी समितियों और सरकारी संस्थानों के नमूने भी शामिल हैं।

मनोज दुबे ने कहा कि किसान की सबसे बड़ी पीड़ा घटिया खाद, बीज और नकली कीटनाशकों से होने वाला नुकसान है। राजस्थान सहित देशभर में नकली खाद-बीज और नकली कीटनाशकों के कारण कृषि उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। फसलें नष्ट होने से खेती-किसानी और किसान दोनों बर्बाद हो रहे हैं।

उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा के कुशासन में किसान खून के आंसू रो रहा है। किसानों को न तो फसल बीमा का पैसा मिल रहा है और न ही अतिवृष्टि में फसल बर्बादी का मुआवजा मिल रहा है। इसके अलावा नकली खाद-बीज और कीटनाशकों से किसान भारी परेशान हैं।

मनोज दुबे ने अमानक खाद, बीज और कीटनाशक बनाने एवं बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि नकली खाद, बीज और कीटनाशक माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए कड़े कानून बनाए जाना अति आवश्यक है। ऐसे लोगों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नकली खाद, बीज और नकली पेस्टिसाइड से किसान तबाह और बर्बाद हो रहे हैं, इसलिए इस पर कड़ाई से रोक लगना बेहद जरूरी है।

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