कोटा के चिकित्सा इतिहास में आज एक नया अध्याय तब जुड़ गया जब 'पेरिनेटल CME 2026' के माध्यम से मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य की दिशा में आधुनिक ज्ञान और तकनीकी कौशल का एक भव्य समागम आयोजित हुआ। श्री जी मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल द्वारा इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) एवं कोटा ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी (KOGS) के संयुक्त तत्वावधान में लोटस अनंता एलीट के गरिमामय प्रांगण में इस उच्चस्तरीय अकादमिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मात्र एक संगोष्ठी न होकर, गर्भावस्था से लेकर नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) तक की जटिल यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने हेतु एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

सम्मेलन का वैचारिक आधार मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने और आधुनिक चिकित्सा प्रोटोकॉल को जमीनी स्तर पर लागू करने के संकल्प पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम में देश के ख्यातिनाम विशेषज्ञों ने अपनी उपस्थिति से चिकित्सा जगत के नवाचारों पर प्रकाश डाला। एम्स (AIIMS) जोधपुर से पधारे सुप्रसिद्ध नियोनेटोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. नीरज गुप्ता (DM Neonatology) एवं डॉ. जय किशन मित्तल (DM Neonatology) ने नवजात गहन चिकित्सा के अत्यंत जटिल विषयों पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने आधुनिक जीवन रक्षक प्रणालियों और तत्काल उपचार के महत्व को रेखांकित किया।





गर्भावस्था के दौरान आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करते हुए विख्यात विशेषज्ञ डॉ. मीना नायक (MD, FRCOG – UK) ने हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी मैनेजमेंट के अंतरराष्ट्रीय मानकों और अपने दीर्घकालीन अनुभवों को साझा किया। वहीं, चिकित्सा विज्ञान की उभरती शाखा जेनेटिक्स पर केंद्रित सत्र में डॉ. अदिति सिंह (PhD, मेडिकल जेनेटिसिस्ट) ने एंटिनेटल जेनेटिक स्क्रीनिंग और जेनेटिक काउंसलिंग की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया कि कैसे प्रारंभिक जांच से जन्मजात विकारों को समझा और प्रबंधित किया जा सकता है। इसी क्रम में डॉ. नीता जिंदल (MD, Pediatrics) ने पेरिनेटल अवधि के दौरान शिशु स्वास्थ्य प्रबंधन के व्यावहारिक और क्लिनिकल पहलुओं को इतनी सरलता से प्रस्तुत किया कि उपस्थित चिकित्सक उसे अपनी दैनिक कार्यप्रणाली में उतारने के लिए प्रेरित हुए।

इस संगोष्ठी का सबसे जीवंत हिस्सा 'केस-बेस्ड पैनल डिस्कशन' रहा, जिसका सूक्ष्म और प्रभावी मॉडरेशन डॉ. प्रिया गुप्ता एवं डॉ. विवेक गुप्ता द्वारा किया गया। इस चर्चा के दौरान वास्तविक क्लिनिकल चुनौतियों, आपातकालीन स्थिति में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और टीम-आधारित प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन विमर्श हुआ। डॉ. नीता जिंदल ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि पेरिनेटल चरण माँ और शिशु दोनों के लिए एक नाजुक पुल के समान है, जिसे केवल समन्वित टीमवर्क और अपडेटेड गाइडलाइंस के माध्यम से ही सफलतापूर्वक पार किया जा सकता है। कोटा संभाग सहित आसपास के जिलों से आए सैकड़ों चिकित्सकों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को एक नई ऊंचाई प्रदान की। अंततः, यह CME न केवल शैक्षणिक रूप से समृद्ध रही, बल्कि इसने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को एक नई और सुरक्षित दिशा प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

Pratahkal Bureau

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