कोटा। आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञता के समन्वय से कोटा स्थित ईथॉस हॉस्पिटल में रीढ़ की हड्डी के तीन माह पुराने जटिल फ्रैक्चर का सफल ऑपरेशन कर मरीज को नई जीवन आशा प्रदान की गई।

मरीज की स्थिति और गंभीर चोट का विवरण

झालावाड़ निवासी 45 वर्षीय मरीज लंबे समय से कमर में तीव्र दर्द, चलने में कठिनाई तथा दोनों पैरों में दर्द एवं झनझनाहट की समस्या से पीड़ित था। जानकारी के अनुसार करीब तीन महीने पूर्व एक हादसे में उसकी रीढ़ की हड्डी के L1 वर्टिब्रा में गंभीर फ्लेक्शन-डिस्ट्रैक्शन फ्रैक्चर हो गया था। प्रारंभिक स्तर पर बिना सर्जरी उपचार की सलाह दी गई, किन्तु समय के साथ स्थिति बिगड़ती चली गई। बाद में मरीज ने स्पाइन विशेषज्ञ डॉ. गौरव मेहता से परामर्श लिया। विस्तृत जांच में फ्रैक्चर अस्थिर पाया गया, जिससे भविष्य में स्थायी विकृति एवं पैरों में कमजोरी का खतरा था।

आधुनिक तकनीक और सफल सर्जरी

मरीज का वजन अधिक होने के कारण पारंपरिक ओपन सर्जरी में जटिलताओं की आशंका को देखते हुए चिकित्सकों ने मिनिमली इनवेसिव सर्जरी (MIS) तकनीक का चयन किया। सर्जरी के दौरान T11 से L3 तक स्क्रू फिक्सेशन कर रीढ़ को स्थिर किया गया। यह प्रक्रिया छोटे चीरे से संपन्न की गई, जिससे रक्तस्राव न्यूनतम रहा और रिकवरी शीघ्र हुई।

विशेषज्ञों की राय और सुधार

डॉ. मेहता के अनुसार "सर्जरी के पश्चात मरीज के कमर दर्द, पैरों में दर्द एवं झनझनाहट में पूर्ण सुधार हुआ है और वह सामान्य रूप से चलने-फिरने लगा है।" संस्थान के निदेशक प्रदीप दाधीच ने बताया कि "समय पर सटीक निदान और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से रीढ़ से संबंधित जटिल मामलों का भी सफल उपचार संभव हो रहा है।" अत्याधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के कारण ही आज रीढ़ की हड्डी के जटिल फ्रैक्चर का सफल ऑपरेशन कर मरीज को नई जीवन आशा प्रदान करना संभव हुआ है।

Pratahkal Bureau

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