कोटा, 29 नवंबर। ग्रामीणों की शिकायत के बाद ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर शुक्रवार देर रात आलनिया बांध की नहरों का अचानक निरीक्षण करने पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने नहरों में घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग और गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। मंत्री नागर ने तुरंत जांच कराने और दोषपूर्ण निर्माण को तोड़कर फिर से बनाने के निर्देश दिए।

मंत्री नागर के आलनिया बांध पहुंचने से पहले ग्रामीणों ने रात्रि चौपाल में नहरों के घटिया निर्माण की शिकायत की थी। इसके बाद मंत्री नागर ने कनवास से कोटा आते हुए बांध पर निरीक्षण किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी उनके साथ मौजूद थे। आलनिया नहरी तंत्र से लाडपुरा के 27 तथा कनवास तहसील के 9 गांवों की 7882 हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है। वर्तमान में कच्ची नहरों को पक्का करने के लिए 30 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि से निर्माण कार्य चल रहा है।

निरीक्षण के दौरान मंत्री नागर ने देखा कि नहरों की दीवारों पर ठोकर मारने मात्र से क्रेशर डस्ट गिरने लगा, सरफेस का काम अधूरा और टाइल की गुणवत्ता भी घटिया थी। आलनिया एसई ने घटिया निर्माण की बात स्वीकार की, जिसके बाद मंत्री ने तीन दिनों के भीतर दोषपूर्ण निर्माण को तोड़ने और पूरी जांच करने के आदेश दिए।

मंत्री ने कहा कि उनका उद्देश्य घटिया निर्माण और बिलो रेट पर काम हथियाने की प्रवृत्ति पर कड़ी कार्रवाई करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण की प्रवृत्ति लंबे समय से जारी है, लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है।

इससे पहले ग्रामीणों ने मंत्री नागर से जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत को फोन कर दोषपूर्ण निर्माण और भ्रष्टाचार की जानकारी देने का अनुरोध किया था। मंत्री नागर ने हरिश्चंद्र सागर परियोजना, आलनिया और सावन भादौ परियोजना की नहर मरम्मत की भी जांच के लिए विजिलेंस टीम गठित करने का सुझाव दिया।

ऊर्जा मंत्री ने बनियानी गांव में पीएचईडी ठेकेदार पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल से पूरा गांव खुदा पड़ा है, लेकिन ठेकेदार ने काम पूरा नहीं किया। ऐसे ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और सभी कार्यों की जांच कर रिकवरी निकालने के निर्देश दिए।

मंत्री नागर ने आलनिया मध्यम सिंचाई परियोजना के विस्तार की योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि परियोजना को 75% क्षमता पर डिजाइन किया गया था, लेकिन 27 वर्षों में केवल 11 वर्षों में पूर्ण क्षमता तक पानी भर पाया। अब सरकार बांध की ऊंचाई बढ़ाकर सीमावर्ती 36 गांवों के वंचित क्षेत्रों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है। इसके लिए चंबल दाईं मुख्य नहर से पानी लिफ्ट कर डायवर्जन चैनल के माध्यम से आलनिया बांध में लाया जाएगा। परियोजना का सर्वे और फिजिबिलिटी रिपोर्ट लगभग 90% पूर्ण हो चुकी है।

आलनिया कमांड क्षेत्र में शामिल गांवों में आमली, पीसाहेड़ा, देवली, ढीकोली, बंदा, खजूरी, बृजनगर, कुराड़, खाडीपुर, मवासा, ढाणी, बोरिया खेड़ी, रूपारेल, प्रहलादपुरा, जामपुरा, रामनगर, जाखोड़ा, अभयपुरा, लाडपुर, बड़ोदिया, रानीपुरा, गंदीफली, गलाना, भगवानपुरा, चारणहेड़ी, परलिया, छिपनहेड़ी, पीपलखेड़ी, सिमलहेड़ी, अरलिया, कीतलहेड़ा, बनियानी, शंकरपुरा, अरंडखेड़ा, दीपपुरा और बालापुरा शामिल हैं।

मंत्री नागर का यह निरीक्षण न केवल घटिया निर्माण को रोकने की दिशा में एक मजबूत संदेश है, बल्कि ग्रामीणों को बेहतर सिंचाई सुविधा और सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता की उम्मीद भी देता है।

Pratahkal Bureau

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