भारतीय काल गणना को डॉ. प्रताप सिंह ने बताया सर्वश्रेष्ठ और पूर्ण वैज्ञानिक
कोटा में आयोजित नवसंवत्सर समारोह में कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह और प्रोफेसर नारायण हेड़ा ने सनातन संस्कृति की वैज्ञानिकता और प्रकृति के साथ इसके सामंजस्य पर चर्चा की।

कोटा। सनातन संस्कृति, विज्ञान और परंपराओं के अद्भुत संगम के साथ श्री धाकड़ कर्मचारी संघ कोटा द्वारा नवसंवत्सर अभिनंदन एवं स्नेह मिलन समारोह का भव्य आयोजन काला तालाब स्थित एक निजी रिसोर्ट में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की महत्ता को प्रतिपादित करते हुए मुख्य अतिथि एवं महाराणा प्रताप कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह धाकड़ ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में स्पष्ट किया कि भारतीय कैलेंडर और यहाँ की काल गणना न केवल विश्व में सर्वश्रेष्ठ है, अपितु यह पूर्णतया वैज्ञानिक आधारों पर टिकी हुई है।
समारोह के मुख्य वक्ता, कोटा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नारायण हेड़ा ने सनातन संस्कृति की गौरवशाली महानता को उजागर करते हुए कहा कि हमारी समस्त परंपराएं और संस्कृति प्रकृति के साथ सटीक सामंजस्य स्थापित करते हुए निर्मित की गई हैं। उन्होंने भारतीय काल गणना की गहनता और उसकी अचूक सटीकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। आध्यात्मिक पक्ष रखते हुए कबीर पारख संस्थान के संत प्रभाकर साहिब ने वर्तमान परिवेश में सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया और शुचितापूर्ण व सच्चरित्र जीवन जीने का आह्वान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ गायत्री परिवार कोटा के हेमराज पांचाल द्वारा किए गए वैदिक मंत्रोच्चार से हुआ, जिससे संपूर्ण वातावरण वेदमय हो उठा।
मंच पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में श्री धाकड़ पंचायत अध्यक्ष एडवोकेट नरेंद्र नागर, मालव विकास समिति के संभागीय अध्यक्ष किशन मालव, किराड़ सभा के प्रांतीय अध्यक्ष राम बिलास मेहता, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मुकुट नागर, समाजसेवी डॉ. रामस्वरूप मालव एवं कोटा विश्वविद्यालय के ओम त्रिपाठी उपस्थित रहे। श्री धाकड़ कर्मचारी संघ के संयोजक रमेश नागर ने अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया, जबकि सहसंयोजक रामवतार नागर ने स्वागत भाषण से आगंतुकों का अभिनंदन किया। संगठन की भावी योजनाओं और वर्तमान गतिविधियों का विवरण सहसंयोजक प्रदीप ढोटी द्वारा साझा किया गया।
समारोह के दौरान संगठन के पदाधिकारियों—हरीश नागर, बजरंग नागर, अनुराधा मेहता, संतोष नागर, तेज मल धाकड़, ओम नागर, उषा मालव, नंद बिहारी मालव, आनंद नागर, ब्रज मोहन नागर, तेज करण मालव और महावीर अंथड़ा—ने अतिथियों का माल्यार्पण कर एवं प्रभु श्री रामलला की तस्वीर भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में इंद्र नागर बड़ोद ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। संयोजक रमेश नागर ने आयोजन को धर्म, विज्ञान और संस्कृति का अनूठा संगम बताया, जिसमें धाकड़ समाज की तीनों इकाइयों की संस्थाओं के पदाधिकारी, गणमान्य बंधु और सैकड़ों सदस्य साक्षी बने। यह आयोजन समाज में सांस्कृतिक चेतना और एकजुटता के नए मानक स्थापित करने वाला सिद्ध हुआ।

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