कोटा में जैन रामकथा के दूसरे दिन भक्तिभावपूर्ण संदेशों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया
कोटा के अकलंक स्कूल में आयोजित श्री जैन रामकथा के दूसरे दिन धर्म चक्रवर्ती जयकीर्ति जी गुरुराज के मार्गदर्शन में रामकथा के मार्मिक प्रसंग और भक्ति–रस ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा ने जिनभक्ति, मर्यादा, त्याग और संयम के संदेशों को गहराई से प्रस्तुत किया।

कोटा। अकलंक स्कूल प्रांगण में आयोजित पद्मपुराण आधारित श्री जैन रामकथा के दूसरे दिन शहर के श्रद्धालु आध्यात्मिक दिव्यता और भक्ति रस में डूब गए। धर्म चक्रवर्ती, राम कथाकार और अनुष्ठान विशेषज्ञ परम पूज्य ध्यान दिवाकर मुनि प्रवर 108 श्री जयकीर्ति जी गुरुराज के सान्निध्य में कथा में रामकथा के मार्मिक प्रसंगों और आध्यात्मिक संदेशों ने उपस्थित जनों को भाव-विभोर कर दिया।
कथा का आरंभ प्रातः दीपप्रज्जोलन और चित्र अनावरण के साथ हुआ। पाद प्रक्षालन का सौभाग्य अकलंक स्कूल के विद्यार्थियों और पीयूष बज को प्राप्त हुआ। गुरुदेव ने अपने प्रेरक मंगल प्रवचन में कहा कि “जिनभक्ति से बढ़कर संसार में कोई अन्य पुण्य नहीं।” उन्होंने भजन–सरिता के माध्यम से रामछवि के प्रति भक्तिभाव जगाया और रामायण के उन प्रसंगों को रेखांकित किया, जिनमें मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श, सत्य, संयम, अहिंसा तथा मुनिधर्म की सर्वोच्च प्रतिष्ठा दिखाई देती है।
कथा में पद्मपुराण के प्रमुख पात्र—राम, लक्ष्मण और भरत—की तपस्या, त्याग और वैराग्य के प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया। श्रीराम के वनगमन, दशरथ के वैराग्य, भरत की करुण विरहावस्था तथा धुती आचार्य द्वारा गृहस्थ धर्म के महत्व पर दिए गए उपदेशों ने श्रद्धालुओं के हृदय को गहराई से स्पंदित किया। गुरुदेव ने कहा, “संसार में जितने भी जीव सिद्ध और मुक्त हुए हैं, वे सभी जिनधर्म की शरण में आकर ही मुक्त हुए हैं।”
इस अवसर पर जिनवाणी भेंटकर्ता के रूप में चांदमल–विमला देवी, महेश मीना–प्रमोद वर्षा, डॉ. सुरभि, डॉ. भव्य गंगवाल (गुलाबवाड़ी) तथा राजा श्रेणिक परिवार—ओमप्रकाश–साधना, विकास–नेहा, विश्वास–अंजू पाटोदी (गुलाबवाड़ी) उपस्थित रहे। मंगलाचरण अकलंक स्कूल के विद्यार्थी कुमार परेश जैन ने किया। समाज के प्रतिष्ठित गणमान्य नागरिकों—जे.के. जैन, नरेश वैद, एम.के. जैन, प्रकाश पपड़ीवाल, भागचंद लोहड़िया, दीपचंद पहाड़िया, चेतनप्रकाश जैन, अनिल श्रीमाल, कैलाश जैसवाल, राहुल जैसवाल, गुलाबचंद लोहड़िया, जंबू बड़जात्या समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।
रामकथा के इस आयोजन ने न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक चेतना को जागृत किया, बल्कि श्रद्धालुओं को जीवन में मर्यादा, त्याग और संयम के महत्व का अनुभव भी कराया। कोटा में जैन धर्म की इस अनूठी रामकथा ने भक्तिभाव को चरम पर पहुँचाकर सभी उपस्थित जनों के मन-मस्तिष्क में अमिट छाप छोड़ी।
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Pratahkal Bureau
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