दशलक्षण पर्व के अवसर पर आयोजित धर्मसभा में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से पुण्यार्जन किया। श्रावक श्रेष्ठी, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, शास्त्र भेंट, कलश स्थापना, महाआरती, शांतिधारा, दशलक्षण विधान, भक्तामर विधान और तत्त्वार्थ सूत्र सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं श्रद्धापूर्वक सम्पन्न हुईं।

प्रशासनिक मंत्री श्रीमती अर्चना जैन सर्राफ ने बताया कि श्रावक श्रेष्ठी, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट का पुण्यार्जन कमल जी, दीप्ति जी, अंजना जी एवं जतिन परिवार द्वारा श्रद्धापूर्वक किया गया। कलश स्थापना का पुण्यार्जन अभय कुमार जी, रानी जी एवं नगेदा परिवार द्वारा किया गया।

श्री सुमित सेंकी ने बताया कि महाआरती का पुण्यार्जन मनोहर बाई एवं नमन ट्रेवल्स परिवार द्वारा किया गया। वहीं, अन्य विवरण में महाआरती का पुण्यार्जन अजय कन्जोलिया परिवार द्वारा किए जाने की जानकारी दी गई है।

श्री मनोज बगड़ा ने बताया कि आज की शांतिधारा का पुण्यार्जन श्रीमान अनिल कुमार, अनुराग एवं अंश पोदार परिवार; श्रीमान बोधराज, राजकुमार एवं अशोक दुगेरिया परिवार; श्रीमती सुशीला बाई, अशोक एवं राजकुमार ठोरा परिवार; श्रीमान हेमंत कुमार, मनोज एवं प्रतीक जैसवाल परिवार तथा श्रीमान चन्द्र प्रकाश, पीयूष एवं अभिषेक कोटिया परिवार द्वारा किया गया।

श्री धर्मचंद धनोप्या ने बताया कि दशलक्षण विधान में महावीर मित्तल, प्रेम कासलीवाल, संजय लुहाड़िया, डॉ. संतोष, जम्बू, रानी दुगेरिया एवं सुशीला ठोरा सहित पांच अन्य श्रद्धालुओं ने पुण्यार्जन किया। भक्तामर विधान का पुण्यार्जन श्रीमती किश्कन्धा बाई, जम्बू कुमार जी एवं भानु जी द्वारा श्रद्धापूर्वक किया गया।

तत्त्वार्थ सूत्र का पुण्यार्जन दीप्ति जैन, प्रमोद कुमारी, अंजना जी, आशा श्रीमाल एवं सुमित्रा द्वारा भक्तिभाव से किया गया।

श्री सुनील माडिया ने बताया कि मुनि श्री योगसागर जी महाराज के आहारदान का पुण्यार्जन/सौभाग्य उपवासकर्ता को प्राप्त हुआ। वहीं, अन्य विवरण में मुनि श्री योगसागर जी महाराज के आहारदान का पुण्यार्जन/सौभाग्य मुकेश जी एवं अर्पित जी को प्राप्त होने की जानकारी दी गई है।

श्री दर्शन बरमुंडा ने बताया कि मुनि श्री प्रणवसागर जी महाराज के आहारदान का सौभाग्य मुकेश जी एवं अर्पित जी को प्राप्त हुआ। वहीं, अन्य विवरण में मुनि श्री प्रणवसागर जी महाराज के आहारदान का सौभाग्य उपवासकर्ता को प्राप्त होने की जानकारी दी गई है।

मंगलाचरण का पुण्य अवसर भी श्रद्धाभावपूर्वक सम्पन्न हुआ। धर्मसभा के समापन पर श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री की पूजन-अर्चना, अर्घ्य समर्पण एवं जिनवाणी वंदना कर धर्मलाभ अर्जित किया।

गुरुवाणी के अमृत संदेश में प्रवचन का सार बताते हुए कहा गया कि ब्रह्मचर्य केवल विषय-वासनाओं से दूर रहने का नाम नहीं, बल्कि अपनी आत्मा में रमण करने की साधना है। इंद्रियों को विषयों से हटाकर आत्मा की ओर मोड़ें, पवित्र विचारों और संयमित जीवन को अपनाएं। दशलक्षण के दसों धर्मों को केवल पर्व के दस दिनों तक सीमित न रखकर जीवन का स्थायी संस्कार बनाएं। देव-शास्त्र-गुरु के मार्गदर्शन में आत्मस्वरूप की ओर बढ़ना ही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की सच्ची आराधना है।

धर्मसभा में हुए विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं की सहभागिता और पुण्यार्जन के साथ दशलक्षण पर्व के आध्यात्मिक संदेश को जीवन में आत्मसात करने पर जोर दिया गया।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

Next Story