औषधीय महत्व और वैश्विक मांग के केंद्र में रहे ‘हिमालयन गोल्ड’ कॉर्डिसेप्स पर कोटा विश्वविद्यालय के सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग द्वारा मंगलवार, 5 मई, 2026 को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें इसके कृत्रिम उत्पादन और उन्नत तकनीकों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. आर. के. लवानिया (सी.एम.एच.ओ. एवं संयुक्त निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, कोटा) ने अपने संबोधन में कॉर्डिसेप्स के औषधीय महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। डॉ. पल्लवी शर्मा के संचालन में आयोजित इस सत्र में विभाग की डॉ. नेहा चौहान और डॉ. श्वेता गुप्ता ने तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।

विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को अवगत कराया कि कॉर्डिसेप्स का उत्पादन पूर्णतः नियंत्रित वातावरण में किया जाता है, जिसमें प्रयोगशाला में 18°C से 22°C तक का स्थिर तापमान और लगभग 70 से 80 प्रतिशत आर्द्रता बनाए रखना अनिवार्य होता है। इसके लिए लैमिनार एयर फ्लो, ऑटोक्लेव तथा विशेष प्रकाश व्यवस्था से युक्त इनक्यूबेशन रूम की आवश्यकता होती है।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान छात्रों को ब्राउन राइस तैयार करने की प्रक्रिया से लेकर उच्च गुणवत्ता वाले कल्चर के चयन, स्पॉनिंग (बीजारोपण) और माइसेलियम की वृद्धि के लिए अनुकूल परिस्थितियों के प्रबंधन तक की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही बताया गया कि लगभग 60 से 70 दिनों के चक्र में इस मशरूम की खेती कर इसे सुखाकर सुरक्षित पैकेजिंग के माध्यम से बाजार में उतारा जा सकता है।

कार्यशाला में कॉर्डिसेप्स की बहुमुखी उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला गया। इसे पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, शारीरिक सहनशक्ति सुधारने और थकान कम करने के लिए शक्तिशाली ‘एनर्जी बूस्टर’ के रूप में उपयोग किया जाता है। इसके औषधीय गुणों में एंटी-कैंसर, एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-एजिंग तत्व शामिल हैं, जो हृदय स्वास्थ्य सुधारने, किडनी की कार्यक्षमता को समर्थन देने और श्वसन संबंधी विकारों के उपचार में सहायक होते हैं। चिकित्सा क्षेत्र के अलावा इसका उपयोग उच्च गुणवत्ता वाले न्यूट्रास्यूटिकल्स, हेल्थ सप्लीमेंट्स और सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

बढ़ती वैश्विक मांग के बीच कॉर्डिसेप्स सूक्ष्मजीव विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान और उच्च-मूल्य वाले कृषि व्यवसाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में उभर रहा है। कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान कर उद्यमिता की दिशा में प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही तथा अंत में सभी सफल प्रतिभागियों को ई-प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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