कोटा, 16 नवम्बर। कंसुआ रायपुरा स्थित विवादित भूखंड को लेकर अतिरिक्त सिविल न्यायालय क्रम-1 उत्तर के अस्थाई निषेधाज्ञा आदेश के बावजूद अवमानना का मामला सामने आया है। प्रार्थी गजेंद्र सिंह उर्फ घनश्याम सिंह का आरोप है कि पुलिस के संरक्षण में आरोपी भूमि को नुकसान पहुंचाने पर आमादा हैं।

घनश्याम सिंह ने बताया कि खसरा नंबर 471 रायपुरा में उनका 3/4 हिस्सा तथा खसरा नंबर 235 का 0.59 हेक्टेयर भूमि ग्राम कंसुआ रायपुरा में स्थित है। इसके बावजूद हितेंद्र सिंह, गीता सिंह, हमीर सिंह, गीतांजलि और मिथुन सरोजा ने कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर स्वयं को मालिक बताकर भूमि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।

मामले में 6 मार्च 2020 को घनश्याम सिंह द्वारा प्रस्तुत प्रकरण का निस्तारण करते हुए न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अस्थाई निषेधाज्ञा पारित की थी। आदेश के अनुसार मूल वाद के निस्तारण तक यथास्थिति बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को प्रतिबंधित किया गया था।

घनश्याम सिंह का आरोप है कि 1 नवंबर 2025 को भी विवादित भूमि पर गड्ढा खोदने के लिए जेसीबी मशीन का प्रयोग किया गया और बॉर्डर लाइन को तोड़ा गया, जबकि यह कार्य पुलिस के संरक्षण में किया गया। उन्होंने इसे न्यायालय की अवमानना बताया।

पूर्व में विवादित भूमि पर अवैध कब्जा करने की नीयत से भूमाफिया मिथुन सरोजा, बॉबी मेवाड़ा, हितेंद्र सिंह, अब्दुल फरीद और अभिमन्यु सिंह ने फर्जी मुख्तारनामों के आधार पर प्लाट बेचने का झूठा आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराई थी। लेकिन पुलिस अनुसंधान एवं फॉरेंसिक एफएसएल जांच में यह आरोप झूठा पाया गया, जिस पर न्यायालय ने एसीजेएम क्रम संख्या 7 कोटा द्वारा एफआर स्वीकृति प्रदान की थी।

यह मामला न केवल न्यायालय के आदेशों की अवमानना को उजागर करता है, बल्कि पुलिस संरक्षण में चल रहे अवैध कार्यों पर भी सवाल उठाता है। इससे कानून व्यवस्था और संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा की गंभीरता पर ध्यान देने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

Pratahkal Bureau

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