कोटा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना 'मनरेगा' के स्वरूप में बदलाव और नए 'जीरामजी' बिल को लेकर सियासत गरमा गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर रविवार को कोटा के कैथून सांगोद रोड स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल के बाहर महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष कांग्रेस जनों ने एक विशाल मौन सत्याग्रह और उपवास कार्यक्रम आयोजित किया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष राखी गौतम और देहात कांग्रेस अध्यक्ष भानूप्रताप सिंह के संयुक्त नेतृत्व में आयोजित इस धरने में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री शांति धारीवाल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए मनरेगा के मूल ढांचे को नष्ट करने का आरोप लगाया। दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक चले इस तीन घंटे के प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौन रहकर सरकार की नीतियों के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

वरिष्ठ नेता शांति धारीवाल ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि मनरेगा में जहां पहले 100 दिन के रोजगार की पक्की गारंटी थी, वहीं अब इसे राज्यों पर निर्भर कर दिया गया है, जिससे गरीब मजदूरों के हक पर कुठाराघात हुआ है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि विदेशों की संसद में जहां गांधी जी को सम्मान दिया जाता है, वहीं केंद्र सरकार ने योजना से उनका नाम हटाकर महापुरुषों का अपमान किया है। धारीवाल ने आरोप लगाया कि 'जीरामजी' योजना के माध्यम से मोदी सरकार रोजगार के अधिकार को अपने रिमोट कंट्रोल से चलाना चाहती है, जो सीधे तौर पर तानाशाही का प्रतीक है। शहर अध्यक्ष राखी गौतम ने इस बिल को गरीब मजदूरों की आत्मा पर प्रहार बताते हुए कहा कि अब पंचायतों के अधिकार छीनकर ब्यूरोक्रेसी को सौंप दिए गए हैं। उन्होंने घोषणा की कि 10 जनवरी से 5 फरवरी तक चलने वाला यह 'मनरेगा बचाओ संग्राम' वार्ड और ब्लॉक स्तर तक ले जाया जाएगा ताकि जनता को इस साजिश से अवगत कराया जा सके।

देहात अध्यक्ष भानूप्रताप सिंह और पीसीसी महासचिव देशराज मीणा ने तकनीकी खामियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नई योजना में 60 दिन के काम की भी गारंटी नहीं है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भुखमरी की नौबत आ सकती है। पूर्व प्रधान नईमुद्दीन गुड्डू और विधायक चेतन पटेल ने साझा स्वर में कहा कि ग्राम सभाओं के अधिकारों को खत्म कर पंचायतों को केवल डेटा एंट्री सेंटर बनाया जा रहा है। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष आईना महक ने मनरेगा को करोड़ों परिवारों की संजीवनी बताते हुए इसे बचाने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस की एकजुटता तब दिखाई दी जब मंच पर पूर्व अध्यक्ष रविन्द्र त्यागी, पीसीसी महासचिव अमित धारीवाल, डॉ. जफर मोहम्मद, अनूप ठाकुर, शिवकांत नंदवाना, शिवराज गुंजल और मंजूर तंवर जैसे कद्दावर नेता एक साथ नजर आए।

इस व्यापक सत्याग्रह में पूर्व अल्पसंख्यक प्रदेशाध्यक्ष आबिद कागजी, उप प्रधान अशोक मीणा, सरपंच मुईजुद्दीन गुड्डू, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष गायत्री मीणा, अल्पसंख्यक जिलाध्यक्ष मो. जुबेर, असरार अहमद, निर्वतमान उपमहापौर पवन मीणा, सोनू कुरैशी, ब्लॉक अध्यक्ष गीता मेघवाल, अनूप मेहरा, नेवालाल गुर्जर, ललित शर्मा, जयेश शृंगी, पूर्व प्रधान राजेंद्र मेघवाल, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष भुवनेश तिवारी, राजेंद्र रैगर, लालचंद सैनी और पूर्व सरपंच कालूलाल मेहरा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनके साथ ही शिक्षक संघ नेता ईश्वर सिंह, पूर्व जिला परिषद सदस्य रामराज यादव, उपसरपंच शोयब, पूर्व पंचायत सदस्य मुकुट नागर, पार्षद शमीम, एससी विभाग प्रदेश महामंत्री दिनेश खटीक, मंडल अध्यक्ष हेमचंद कुशवाह, तौसीफ अली, अमृत मीणा, कमल गहलोत, जिशान, अरवींद्र सिंह ब्रजलिया, चेतन सोलंकी, मनीष भारद्वाज, धर्मवीर मेघवाल, चेतन पारेता, संजय जैन, शहजाद खान, प्रेम पालीवाल, मोहम्मद सिद्धिक अंसारी और जिला कांग्रेस पदाधिकारी सुभाष सैनिक, अनुराग गौतम, कपिल शर्मा, बबलू कसाना, रेहाना खान, मनोज गुप्ता, विजय गुप्ता, अनूप कुमार अन्नू, कुलदीप प्रजापति, राहुल पुरुस्वानी, वसीम भाटी, योगेश चावला, सिख बोर्ड पूर्व उपाध्यक्ष हरपाल राणा, सेवादल जिलाध्यक्ष प्रेम लाहौरीया, यूथ कांग्रेस स्टेट कॉर्डिनेटर शुभम गुर्जर, पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह मंडा, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष शहर विशाल मेवाड़ा, निरंजन योगी, चिकित्सा प्रकोष्ठ जिलाध्यक दीपक वर्मा, शशि शर्मा, शानू इनायत, मुकेश योगी, अमित दाधीच, मनीष पारेता, महावीर मेघवाल, श्याम गौतम, मनजीर हुसैन, जावेद माईकल, प्रेम जाटव, जुल्फिकार अली, कुणाल शर्मा, गिरिराज भार्गव, नागेश शर्मा, सोनू बंसल, अमन खान, करन रैगर, ताहिर और हेमंत नागर सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने हुंकार भरी। महासचिव डॉ. विजय सोनी ने कार्यक्रम के समापन पर कहा कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक मजदूरों को उनका कानूनी हक वापस नहीं मिल जाता।

Pratahkal Bureau

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