क्लस्टर डेवलपमेंट और जीआई टैग से कोटा नमकीन को मिलेगी नई पहचान, उद्योग को मिला संगठित मंच
कोटा में आयोजित कोटा नमकीन व्यापार समिति के वार्षिक मिलन समारोह में नमकीन उद्योग के लिए क्लस्टर डेवलपमेंट और जीआई टैग पर मंथन हुआ। सरकारी योजनाओं, सब्सिडी, तकनीकी उन्नयन और संगठित विपणन के जरिए कोटा नमकीन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का रोडमैप प्रस्तुत किया गया।

कोटा। कोटा की पहचान केवल शिक्षा नगरी तक सीमित नहीं, बल्कि यहां का पारंपरिक नमकीन उद्योग भी अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान की ओर तेज़ी से अग्रसर है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रविवार को उस समय देखने को मिला, जब कोटा नमकीन व्यापार समिति (KNVS) के तत्वावधान में होटल 5 फ्लेवर, डीसीएम रोड पर वार्षिक मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह ने कोटा–हाड़ौती–राजस्थान के नमकीन उद्योग को एक साझा, संगठित और सशक्त मंच प्रदान किया, जहां भविष्य की रणनीति, सरकारी योजनाओं और नवाचारों पर गहन मंथन हुआ।
समारोह में जिले सहित हाड़ौती अंचल और प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए नमकीन निर्माता, व्यापारी, बैंक प्रतिनिधि, औद्योगिक संस्थानों के अधिकारी और स्पॉन्सर कंपनियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक नमकीन उद्योग को आधुनिक तकनीक, संगठित विपणन और सरकारी योजनाओं से जोड़कर प्रतिस्पर्धी बनाना रहा।
समिति के अध्यक्ष जगदीश गांधी और महामंत्री प्रमोद पुरस्वानी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि केंद्र व राज्य सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME), मुद्रा योजना, स्टैंड–अप इंडिया, क्रेडिट गारंटी स्कीम, फूड सेफ्टी लाइसेंसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और तकनीकी उन्नयन जैसी योजनाएं नमकीन उद्योग के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती हैं। अधिकारियों ने योजनाओं का लाभ लेकर उत्पादन लागत घटाने, गुणवत्ता सुधारने और निर्यात की संभावनाएं विकसित करने पर विशेष जोर दिया।
स्वागत भाषण में अध्यक्ष जगदीश गांधी ने कहा कि कोटा शहर में प्रतिदिन लगभग 20 टन नमकीन की खपत होती है, जो इस उद्योग की विशाल संभावनाओं को दर्शाती है। उन्होंने फूड लैब को सुदृढ़ रूप से संचालित करने और नमकीन क्लस्टर विकसित करने की आवश्यकता रेखांकित करते हुए कहा कि संगठित प्रयासों से ही यह उद्योग नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
जिला उद्योग केंद्र के प्रतिनिधि हरिमोहन शर्मा ने क्लस्टर डेवलपमेंट स्कीम और विश्वकर्मा उद्यमी योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कोटा फूड क्लस्टर में कोटा नमकीन जैसे पारंपरिक उत्पादों को शामिल किया जाएगा, जिससे स्थानीय उद्यमियों को उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। शर्मा ने एसपीवी (स्पेशल पर्पज व्हीकल) और जीआई टैग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इनके माध्यम से उत्पादों की विशिष्ट पहचान बनती है और व्यापार को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाभ मिलता है।
कार्यक्रम में गोविंद मित्तल ने कहा कि जिस प्रकार कोटा कचोरी देशभर में “कोटा” के नाम से प्रसिद्ध है और कोटा साड़ी को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है, उसी तरह कोटा कचोरी और अन्य नमकीन उत्पादों को भी जीआई टैग मिलने से ब्रांड वैल्यू में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे नई इकाइयों की स्थापना, उत्पादन क्षमता में विस्तार और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
कोटा व्यापार संघ के अध्यक्ष क्रांति जैन और महामंत्री अशोक माहेश्वरी ने नवाचार, गुणवत्ता नियंत्रण और संगठित विपणन को व्यापार की प्रगति के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और क्लस्टर आधारित मॉडल से जोड़ने पर बल दिया, ताकि कोटा के उत्पाद वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।
सिडबी बैंक के वैभव कुमार और PMFME/DRP की अधिकारी सुश्री स्मिता औदिच्या ने जानकारी दी कि नमकीन उत्पादन इकाइयों को परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक ऋण-लिंक्ड सब्सिडी, अधिकतम 10 लाख रुपये तक, उपलब्ध है। स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को प्रति सदस्य 40 हजार रुपये तक बीज पूंजी सहायता दी जाती है, वहीं ब्रांडिंग, मार्केटिंग, प्रशिक्षण और सामान्य बुनियादी ढांचे पर 50 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है।
समारोह को सफल बनाने में समिति के कोषाध्यक्ष सुनील मित्तल, संस्थापक रामनाथ अग्रवाल, संरक्षक राजेन्द्र राजानी, उपाध्यक्ष शरद गुप्ता और महेश अरोड़ा, सह-मंत्री महेन्द्र गोयल, संगठन मंत्री सुनील मतानी और सांस्कृतिक मंत्री महेन्द्र जैन सहित पूरी कार्यकारिणी की सक्रिय भूमिका रही। कार्यक्रम में राजस्थान नमकीन व्यापार महासंघ के प्रतिनिधि, एसएसआई कोटा के संस्थापक गोविंद राम मित्तल, उद्योगपति बजरंग साबू सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
यह वार्षिक मिलन समारोह केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि कोटा नमकीन उद्योग के लिए एक स्पष्ट रोडमैप साबित हुआ, जो पारंपरिक स्वाद को आधुनिक पहचान दिलाने और स्थानीय उद्योग को राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
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