दिनांक 05.03.2026 को लाडपुरा विधायक कल्पना देवी द्वारा विधानसभा में तारांकित प्रश्न के माध्यम से लाडपुरा क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर चन्द्रेसल मठ की जीर्णक्षीर्ण छतरियों के जीर्णोद्धार एवं मरम्मत के संबंध में जानकारी प्राप्त की गई।

स्मारकों के सर्वे एवं विकास पर सवाल

विधायक ने अपने प्रश्न में पूछा कि लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र में कला एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्मारकों एवं सांस्कृतिक स्थलों का कोई सर्वे कराया गया है या नहीं? यदि कराया गया है तो किन-किन स्थानों को चिन्हित किया गया है एवं क्या चिन्हित स्थानों को कला एवं संस्कृति की दृष्टि से विकसित किया जाना प्रस्तावित है? यदि हां, तो वित्तीय वर्ष 2022 से 2025 तक कौन-कौन से कार्यों पर कितनी-कितनी राशि व्यय की गई?

इस पर कला, साहित्य एवं पुरातत्व मंत्री दिया कुमारी ने उत्तर देते हुए बताया कि "लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र में इस प्रकार का कोई पृथक सर्वे विभाग द्वारा नहीं कराया गया है। हालांकि विभाग द्वारा संरक्षित घोषित स्मारकों में चट्टानों पर उत्कीर्ण शैल चित्र, शिव मठ मंदिर, चंद्रेसल मंदिर समूह, मानस गांव शामिल हैं।"

जीर्णोद्धार की कार्य योजना और बजट

क्या पुरातत्व महत्व में संरक्षित चन्द्रेसल मठ की जीर्णक्षीर्ण छतरियों के जीर्णोद्धार एवं मरम्मत की कार्य योजना प्रस्तावित है? इस पर मंत्री जी ने बताया कि "पुरातत्व महत्व में संरक्षित चंद्र शैल मठ की छतरियों के जीर्णोद्धार मरम्मत की वर्तमान में कोई कार्य योजना प्रस्तावित विचाराधीन नहीं है। विभाग में बजट उपलब्धता तथा कार्य प्राथमिकता के आधार पर युक्तियुक्त निर्णय लिया जाकर जीर्णोद्धार एवं मरम्मत के कार्य करवाए जाते हैं।" तथापि शिव मठ मंदिर चन्द्रेसल पर पूर्व में वित्तीय वर्ष 2017-18 और 18-19 में विभाग द्वारा 154 लाख रुपए की राशि के संरक्षण व विकास कार्य संपादित करवाए गए हैं। विधायक ने यह भी पूछा कि क्या क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थानों पर पेनोरमा बनाने का विचार है? इस पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि "वर्तमान में विभाग के स्तर पर इस संबंध में कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।"

मंदिर का ऐतिहासिक महत्व एवं पूर्व कार्य

विधायक ने पूरक प्रश्न में पूछा कि "चंद्रेसल मंदिर बहुत ही सुंदर, भव्य और ग्यारहवीं सदी में बनाया गया मंदिर है, इसलिए इसका संरक्षण बहुत ही महत्वपूर्ण है। चंद्रेसल शिव मंदिर को विभाग द्वारा कब संरक्षित किया गया एवं चंद्रेसल मठ एवं मंदिर पर कौन-कौन से संरक्षण एवं जीर्णोद्धार के कार्य करवाए गए?" मंत्री जी ने उत्तर देते हुए बताया कि "शिव मठ मंदिर चंद्रेसल विभाग द्वारा वर्ष 2008 में संरक्षित किया गया था और चंद्रेसल मठ एवं मंदिर में सभा मंडप का जीर्णोद्धार कार्य, फर्श, सेण्ड स्टोन फ्लोरिंग, लाइम प्लास्टर, कड़ा, शौचालय सुविधा, डस्टबिन, पाथवे, प्लिंथ प्रोटेक्शन, स्टोन बैंच इत्यादि कार्य करवाए गए थे।"

मुख्य शिखर की दरार और भविष्य की योजना

विधायक ने अन्य पूरक प्रश्न में पूछा कि "चंद्रेसल मंदिर पर जो मुख्य शिखर है उसमें क्रेक आ रहा है तो इस शिखर का कार्य क्यों नहीं करवाया गया?" इस पर मंत्री ने बताया कि "जो शिखर का कार्य था मेचिंग पत्थर नहीं मिलने की वजह से यह कार्य नहीं करवाया गया। मंदिर में जहां पर क्रेक आ रहा है तो निश्चित रूप से वहां पर जो कंजर्वेशन का कार्य है वह तुरंत ही करवाएंगे।" क्योंकि रेस्टोरेशन का कोई भी कार्य अगर हम लोग किसी भी पुराने आर्कियोलॉजिकली सिग्निफिकेंट मॉन्यूमेंट में करते हैं तो वहां बहुत ध्यान रखना होता है कि ऐसा कोई काम ना हो जो कि उससे मेचिंग ना हो। "ऐसा कोई मेटेरियल उपयोग में ना हो जो कि उससे मेचिंग ना हो। क्योंकि यह दसवीं और ग्यारहवीं शताब्दी का मंदिर है। उसमें जो भी कार्य करेंगे बहुत सोच समझ के करेंगे और पूरे अच्छे एक्सपर्ट को ऑनबोर्ड लेकर ही करवाया जाएगा। लेकिन बिल्कुल इसमें कंजर्वेशन का काम तो तुरंत करवाना आवश्यक है और वह हम लोग जल्दी करवाएंगे।"

Pratahkal Bureau

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