चम्बल नदी शुद्धिकरण: विधायक संदीप शर्मा ने विधानसभा में उठाया मामला
कोटा में 14 नालों के जरिए चम्बल में गिर रहे 312 एमएलडी गंदे पानी को रोकने और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ने की मांग विधानसभा में रखी गई।

चम्बल: कोटा की अनुपम प्रकृति की देन
"कोटा शहर को चम्बल नदी प्रकृति का अनुपम उपहार है, न केवल कोटा व बूंदी व अन्य जिलों को इस सदानीरा नदी से पीने का पानी मिलता है बल्कि लाखों एकड़ जमीन पर इस नदी के पानी से फसलें लहलहाती है।"
नदी में घुलता प्रदूषण और सरकारी विफलता
विधायक ने कहा कि खेद का विषय है कि इस जीवन दायिनी नदी में हम वर्षों से जहर घोल रहे हैं। प्रदूषण की स्थिति निम्नवत है:
- 14 से भी ज्यादा गंदे नाले शहरभर की गंदगी को चम्बल में मिला रहे हैं।
- दर्जनों योजनाओं बन गई, एनजीटी के आदेश आ गये, कोटा कलेक्टर को नोटिस मिल गये, लेकिन इन नालों का निदान नहीं हो सका।
- पूर्ववती कांग्रेस शासन में 35 नालों को डायवर्ट कर बालीता स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा गया वो केवल इसकी कि ड्रीम प्रोजेक्ट रिवर फ्रंट बन सके लेकिन बाकी के नालों की तरफ ध्यान भी नहीं दिया।
खतरनाक प्रभाव और वर्तमान स्थिति
आज शहर का 312 एमएलडी गंदा पानी रोज चंबल नदी में गिर रहा है जिससे पानी की गुणवत्ता अत्यधिक खराब हो रही है।
इसका घातक प्रभाव निम्न क्षेत्रों पर पड़ रहा है:
- पावन मां चर्मण्यवती नदी के जलीय जंतुओं पर।
- जलापूर्ति जहां-जहां इसके रास्ते होने वाले शहरों के लोगों पर।
- पर्यावरण पर भी दूषित प्रभाव पड़ रहा है।
सदन में मुख्य मांगें
"चम्बल नदी में गिरने वाले सभी गन्दे नालों को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में डायवर्ट कर प्रदूषण पर पूर्ण रोकथाम लगाई जाये।"
विधायक संदीप शर्मा ने जोर देकर कहा कि चम्बल नदी कोटा की जीवनदायनी नदी है और सम्पूर्ण कोटा में पेयजल की आपूर्ति इसी से की जाती है। यह नदी सिंचाई, पेयजल, बिजली उत्पादन और घड़ियालों जैसे लुप्तप्राय जीवों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है।
नमामि गंगे और भ्रष्टाचार के आरोप
केन्द्र सरकार द्वारा सम्पूर्ण देश की नदीयों को स्वच्छता हेतु नमामी गंगें योजना प्रारम्भ की गई। इस योजना के अंतर्गत पूर्ववती कांग्रेस सरकार द्वारा कोटा में सीवरेज पाईप व सीवरेंज ट्रीटमेन्ट प्लांट बनायें गयें, जिसमें घोर भ्रष्टाचार किया गया।
इसी भ्रष्टाचार के परिणामस्वरूप आज भी चम्बल में सीवरेज का गंदा पानी गिर रहा है, जिसका बुरा असर कोटा के लोगों के स्वास्थ्य और चम्बल नदी के जल जीवों पर पड़ रहा है।

Pratahkal Bureau
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