कोटा: चम्बल नदी शुद्धिकरण का मामला विधानसभा में गूंजा, विधायक ने उठाए सवाल
विधायक संदीप शर्मा ने नियम 295 के तहत चम्बल में गिर रहे 312 एमएलडी गंदे पानी और नमामि गंगे योजना में भ्रष्टाचार को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

चम्बल: प्रकृति का अनुपम उपहार और वर्तमान संकट
विधायक ने कहा कि कोटा शहर को चम्बल नदी प्रकृति का अनुपम उपहार है, न केवल कोटा व बूंदी व अन्य जिलों को इस सदानीरा नदी से पीने का पानी मिलता है बल्कि लाखों एकड़ जमीन पर इस नदी के पानी से फसलें लहलहाती है। लेकिन खेद का विषय है कि इस जीवन दायिनी नदी में हम वर्षों से जहर घोल रहे हैं।
- 14 से भी ज्यादा गंदे नाले शहरभर की गंदगी को चम्बल में मिला रहे हैं।
- दर्जनों योजनाओं बन गई, एनजीटी के आदेश आ गये, कोटा कलेक्टर को नोटिस मिल गये, लेकिन इन नालों का निदान नहीं हो सका।
पूर्ववर्ती सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल
"पूर्ववती कांग्रेस शासन में 35 नालों को डायवर्ट कर बालीता स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा गया वो केवल इसकी कि ड्रीम प्रोजेक्ट रिवर फ्रंट बन सके लेकिन बाकी के नालों की तरफ ध्यान भी नहीं दिया।"
आज शहर का 312 एमएलडी गंदा पानी रोज चंबल नदी में गिर रहा है। जिससे पानी की गुणवत्ता अत्यधिक खराब हो रही है। न केवल पावन मां चर्मण्यवती नदी के जलीय जंतुओं पर बल्कि जलापूर्ति जहां जहां इसके रास्ते आने होने वाले शहरों के लोगों पर भी इसका घातक प्रभाव पड़ रहा है तथा पर्यावरण पर भी दूषित प्रभाव पड रहा है।
सदन में प्रमुख मांगें और नदी का महत्व
विधायक संदीप शर्मा नें सदन में मांग की कि:
- चम्बल नदी में गिरने वाले सभी गन्दे नालों को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में डायवर्ट कर प्रदूषण पर पूर्ण रोकथाम लगाई जाये।
- उन्होंने कहा की चम्बल नदी कोटा की जीवनदायनी नदी है।
- चम्बल नदी सें सम्पूण कोटा में पेयजल की आपूर्ति की जाती है।
यह नदी न केवल सिंचाई और पेयजल की आवश्यकताएं पूरी करती है, बल्कि बिजली उत्पादन और घड़ियालों जैसे लुप्तप्राय जीवों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है।
नमामि गंगे योजना और भ्रष्टाचार के आरोप
केन्द्र सरकार द्वारा सम्पूर्ण देश की नदीयों को स्वच्छता हेतु नमामी गंगें योजना प्रारम्भ कि जिसके अन्र्तगत कोटा में पूर्वती काग्रेस सरकार द्वारा कोटा में सीवरेज पाईप व सीवरेंज ट्रीटमेन्ट प्लांट बनायें गयें।
इस योजना में काग्रेस सरकार द्वारा घोर भ्रष्टाचार किया गया जिसके परिणामस्वरूप कोटा की जीवनदायनी नदी चम्बल में सीवरेज का गंदा पानी गिर रहा है।
इसमें कोटा के लोगो पर ही इसका स्वास्थ्य पर असर पड रहा है अपितु चम्बल नदी के जल जीवों पर भी इसका प्रभाव डाल रहे है।

Pratahkal Bureau
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