सनातन संस्कृति की परम पावन धारा को जीवंत करते हुए बोरखेड़ा आश्रम पर पवित्र पावनी मां गंगा अवतरण दिवस और गायत्री जयंती पर्व अत्यंत श्रद्धा, उल्लास व भव्यता के साथ मनाया गया। अध्यात्म, समाज सेवा और लोक कल्याण के इस त्रिवेणी संगम में एक ओर जहां नौ कुंडीय भव्य गायत्री महायज्ञ, विशाल चिकित्सा शिविर और भावपूर्ण भजन संध्या व प्रवचन का आयोजन हुआ, वहीं दूसरी ओर सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन का एक ऐतिहासिक शंखनाद भी देखने को मिला। आश्रम के हाड़ौती संचालक छीतर लाल बटवाड़ी ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह संपूर्ण आयोजन विश्व कल्याण की भावना को समर्पित रहा।

उत्सव की शुरुआत धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुई, जिसमें यज्ञाचार्य कुलदीप मिश्रा ने विश्व कल्याण और गंगा अवतरण के पावन निमित्त गायत्री महामंत्र जप के साथ नौ कुंडीय गायत्री यज्ञ संपन्न कराया। यज्ञ की महिमा के बीच, प्रधान यज्ञ कुंड के यजमान राजेंद्र शर्मा ने प्रधान संचालक यज्ञदत्त हाड़ा का रोली-तिलक लगाकर और रक्षा सूत्र बांधकर विधि-विधान से पूजन किया। इस दौरान डॉक्टर अमित सिंह राठौड़ ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती मोनिका राठौड़ के साथ मुख्य पुरोहित की भूमिका निभाते हुए मां गंगा कलश का पूर्ण श्रद्धा भाव से पूजन किया। मंदिर में पंडित राधा शरण ब्रजवासी व पंडिताइन ने मां गायत्री का अलौकिक श्रृंगार कर संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

इस धार्मिक आयोजन का सबसे क्रांतिकारी और प्रेरक पहलू छबड़ा के कंजर समुदाय के युवा दल और साधकों का संकल्प रहा। युवा लीडर्स तेजकरण व सतीश के नेतृत्व में, अपने पिताओं—अर्जुन कंजर व ओमप्रकाश कंजर की उपस्थिति में—इस समुदाय के युवाओं ने यज्ञ की गवाही में समाज की स्थापित बुराइयों तथा नशा आदि का सदैव के लिए परित्याग करने की ऐतिहासिक घोषणा की।

धार्मिक अनुष्ठान के पश्चात आयोजित धर्मसभा का कुशल संचालन हाड़ौती संचालक छीतर लाल बटावदी ने किया। इस सभा में विचारकों ने राष्ट्र और प्रकृति से जुड़े गंभीर विषयों पर मार्गदर्शन दिया। आयोजन समिति के समन्वयक और आरपीएफ (RPF) के सेवानिवृत्त डिप्टी कमांडेंट श्री मुकुट बिहारी मीणा ने गीता, गऊ, गायत्री और गुरु महिमा का भावपूर्ण बखान किया। प्रभु लाल टेलर ने सुमधुर गणेश वंदना प्रस्तुत की, जबकि तेजकरण व युधिष्ठिर चानसी ने गुरु वंदन गीतों से गुरु सत्ता के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। पर्यावरण संरक्षण के अति महत्वपूर्ण विषय पर प्रेम सुमन ने तथा जल संरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर संत गोविंदाचार्य ने अपने विचार रखे। वहीं, युधिष्ठिर सिंह कौशिक ने अपने विशेष व्याख्यान में वर्तमान काल में यज्ञ-सत्संग की महत्ता, मां गंगा को धरा पर लाने के लिए राजा भागीरथ द्वारा किए गए भगीरथ प्रयासों और 'कौशिक जी की मानव निर्वाण योजना' का विस्तार से उल्लेख किया। इसके साथ ही, वरिष्ठ साधक ओम सुमन ने उपस्थित जनसमुदाय को प्रकृति से निश्छल प्यार करने का संदेश दिया।

समारोह के एक गौरवपूर्ण क्षण में, पंडित रामनारायण बैरवा को उनकी उत्कृष्ट धार्मिक सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। पूर्व महापौर श्रीमती सुमन श्रृंगी, प्रख्यात समाजसेवी श्री अरुण भार्गव, श्री विमल जैन तथा श्री युधिष्ठिर सिंह कौशिक ने उन्हें सादर माला और दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया। इस विशाल समागम को सुचारू रूप से संपन्न कराने में नागरिक सुरक्षा संगठन के स्वयंसेवक शानू, स्काउट गाइड विक्की सिंह, रोहित सुमन, सृष्टि सेवा समिति से रवि गौतम और रूक्मण हाड़ा ने अपना सक्रिय व सराहनीय सहयोग प्रदान किया।

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित जनसमूह को सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ी विधिक व नैतिक शपथ दिलाई गई। प्रधान संचालक यज्ञदत्त हाड़ा ने वहां मौजूद सभी श्रद्धालुओं को बाल विवाह जैसी कुप्रथा को पूरी तरह से रोकने, जल स्रोतों को स्वच्छ रखने और चंबल नदी के जल का सीमित व विवेकपूर्ण मात्रा में उपयोग करने की गंभीर शपथ दिलाई। इस महासंकल्प के साथ ही बोरखेड़ा आश्रम पर आयोजित यह महापर्व केवल एक धार्मिक उत्सव न रहकर, समाज सुधार और पर्यावरण चेतना का एक जीवंत प्रतीक बनकर संपन्न हुआ।

Pratahkal Bureau

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