खरीफ बुवाई सीजन के बीच किसानों के सामने खड़ी विभिन्न चुनौतियों को लेकर भारतीय किसान संघ ने राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। संघ ने फसल बीमा योजना में किसानों के हितों के अनुरूप बदलाव, खाद-बीज की समय पर उपलब्धता, डीजल वितरण व्यवस्था में सुधार तथा विद्युत आपूर्ति और वन्य जीवों से होने वाले फसल नुकसान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम अतिरिक्त जिला कलेक्टर वीरेन्द्र यादव के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।

जिला मंत्री रूपनारायण यादव ने बताया कि जिला अध्यक्ष जगदीश कलमंडा और प्रांत प्रचार प्रमुख आशीष मेहता के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में किसानों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की मांग की गई है। ज्ञापन में विशेष रूप से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के उस प्रावधान पर आपत्ति जताई गई है, जो वर्ष 2023 से लागू है और जिसके तहत खड़ी फसल में हुए नुकसान को व्यक्तिगत क्लेम की श्रेणी से बाहर रखा गया है।

भारतीय किसान संघ का कहना है कि इस व्यवस्था के कारण प्राकृतिक आपदाओं अथवा अन्य कारणों से फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को पर्याप्त राहत नहीं मिल पा रही है। संघ ने मांग की है कि आगामी खरीफ सीजन के लिए बीमा कंपनियों के साथ होने वाले नए अनुबंध में संशोधन कर खड़ी फसल के नुकसान को पुनः व्यक्तिगत क्लेम के दायरे में शामिल किया जाए। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसानों के हितों की अनदेखी की गई तो प्रदेशभर में फसल बीमा योजना के सामूहिक बहिष्कार और आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।

ज्ञापन में डीजल वितरण व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। संघ ने बताया कि वर्तमान गजट प्रावधानों के तहत किसानों को केवल ट्रैक्टर के टैंक में ही डीजल उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि प्लास्टिक ड्रम अथवा अन्य सुरक्षित पात्रों में डीजल देने पर रोक है। इससे किसानों को खेती के व्यस्त मौसम में बार-बार दूरस्थ पेट्रोल पंपों तक जाना पड़ता है, जिससे समय और आर्थिक संसाधनों दोनों की अतिरिक्त खपत होती है। संघ ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित पात्रों में डीजल उपलब्ध कराने की अनुमति देने की मांग की है।

खरीफ बुवाई के दौरान खाद और बीज की उपलब्धता को भी प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया गया। संगठन ने कृषि विभाग से पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने की मांग की ताकि बुवाई कार्य प्रभावित न हो। साथ ही अनुदानित खाद बेचने वाली कंपनियों द्वारा किसानों पर अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव बनाने की शिकायतों का उल्लेख करते हुए ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता बताई गई।

इसके अतिरिक्त ज्ञापन में राजस्व शिविरों के दौरान कब्जे और बहुमत के आधार पर खेतों की तरमीम के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने, राज्य बजट में घोषित 500 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) गठन योजना को शीघ्र स्वीकृति प्रदान कर लागू करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता सुधारने के लिए 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्रों पर ऑटोमेटिक पावर कैपेसिटर लगाने की मांग भी शामिल रही।

संघ ने वन्य जीवों द्वारा फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी। जिला मंत्री रूपनारायण यादव ने कहा कि फसल बीमा कंपनियों के साथ नया अनुबंध होने से पहले किसानों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक संशोधन किए जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समस्याओं का समाधान नहीं होने की स्थिति में संगठन व्यापक आंदोलन की रणनीति पर विचार करेगा।

भारतीय किसान संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन की प्रतिलिपि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा सहित संबंधित विभागों के मंत्रियों और अधिकारियों को भी भेजी गई है, ताकि किसानों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जा सके। इस दौरान प्रांत प्रचार प्रमुख आशीष मेहता, जिला अध्यक्ष जगदीश कलमंडा, जिला मंत्री रूपनारायण यादव, महानगर सह मंत्री रामसहाय उपाध्याय, देवीशंकर गोचर सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को एक साथ उठाते हुए भारतीय किसान संघ का यह ज्ञापन आगामी खरीफ सीजन में कृषि व्यवस्था और किसान हितों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को केंद्र में ले आया है। अब किसानों की निगाहें सरकार के अगले कदम और संभावित निर्णयों पर टिकी हैं।

Pratahkal Bureau

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