भारतीय ज्ञान परंपरा से मानव को नारायण बनाने की क्षमता: शिवप्रसाद
विद्या भारती के अखिल भारतीय मंत्री शिवप्रसाद ने कोटा में प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग के बौद्धिक सत्र में भारतीय संस्कृति और प्राचीन विज्ञान पर विचार रखे।

कोटा के महावीर नगर स्थित स्वामी विवेकानंद विद्यालय में आयोजित 10 दिवसीय नवीन प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग के दौरान संबोधित करते विद्या भारती के अखिल भारतीय मंत्री श्री शिवप्रसाद।
भारतीय ज्ञान परंपरा अत्यंत गहरी और विश्वव्यापी प्रभाव वाली रही है, जिसमें मानव को “नर से नारायण” बनाने की क्षमता निहित है। यह विचार संघ के प्रचारक एवं विद्या भारती के अखिल भारतीय मंत्री श्री शिवप्रसाद ने स्वामी विवेकानंद उच्च माध्यमिक विद्यालय, महावीर नगर तृतीय, विद्या भारती राजस्थान क्षेत्र में आयोजित 10 दिवसीय नवीन प्रशिक्षण प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग के दौरान आयोजित बौद्धिक सत्र में व्यक्त किए।
श्री शिवप्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति, कला, संगीत, विज्ञान, शिक्षा एवं स्थापत्य कला का ज्ञान विश्व के प्रत्येक कोने में विद्यमान है। भारतीय चिंतन सह-अस्तित्व की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय वैज्ञानिकों ने पश्चिमी जगत से भी पूर्व महर्षि कणाद ने परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया, रसायन शास्त्र का ज्ञान नागार्जुन ने दिया, खगोल विज्ञान का आधार आर्यभट्ट ने स्थापित किया, जबकि ग्रहों की गति के आधार पर ज्योतिष का ज्ञान विकसित हुआ। शल्य चिकित्सा एवं औषधि विज्ञान का विस्तृत ज्ञान सुश्रुत एवं चरक ने प्रदान किया तथा राजनीतिक शास्त्र का गहन ज्ञान चाणक्य ने हजारों वर्ष पूर्व दिया था।
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा पौधों में भी जीवन को स्वीकार करती है और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना का अनुसरण करती है। भारत का ज्ञान वेदों एवं उपनिषदों की गुरु परंपरा में निहित है, जो मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में मंचस्थ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया गया। इसके पश्चात एकल गीत की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में विद्या भारती राजस्थान क्षेत्र के संगठन मंत्री श्री गोविंद कुमार, वर्ग के पालक एवं क्षेत्रीय उपाध्यक्ष श्री भरतराम कुम्हार, वर्ग संयोजक श्री नवीन कुमार झा, विद्यालय सचिव श्री सुरेंद्र कुमार सिंहल, हेमेंद्र गौतम, ओम जी मिल तथा प्रशिक्षक टोली के अधिकारी एवं प्रधानाचार्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं आयोजन 10 दिवसीय प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग के अंतर्गत किया गया।
यह प्रशिक्षण वर्ग भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं प्रसार के उद्देश्य से आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों को भारतीय मूल्यों, संस्कृति एवं शैक्षणिक दृष्टिकोण से सशक्त बनाने पर विशेष बल दिया गया।

Pratahkal Bureau
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