दोगुनी आय का वादा हवा-हवाई, किसानों की मुश्किलें सौ गुना बढ़ीं: मनोज दुबे ने खाद-बीज की किल्लत पर सरकार को घेरा
क्या किसानों की आय सचमुच दोगुनी हुई? कोटा में भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने खाद-बीज की भारी किल्लत और सरकार की विफल नीतियों पर उठाए गंभीर सवाल। जानें, क्यों अन्नदाता आज भी बुनियादी संघर्षों के बीच पिस रहा है।

भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे, जिन्होंने हाल ही में कोटा में किसानों की बदहाली और खाद-बीज की किल्लत के मुद्दों पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
कोटा, 24 जून। भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने देश के अन्नदाता की बदहाली पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए हैं। श्री दुबे ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा किसानों की आय को दोगुना करने के बड़े-बड़े दावे पूरी तरह विफल साबित हुए हैं, और हकीकत यह है कि किसानों की आय बढ़ने के बजाय उनकी मुश्किलें सौ गुना तक बढ़ गई हैं। उन्होंने खरीफ फसलों की बुवाई के वर्तमान सीजन को देखते हुए किसानों को डीएपी-यूरिया खाद, उच्च गुणवत्ता वाले बीज और निर्बाध बिजली-पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की है।
किसानों की दयनीय स्थिति का खाका खींचते हुए मनोज दुबे ने कहा कि आज का किसान एमएसपी की गारंटी, बेमौसम बरसात से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा और कर्जमाफी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि बुवाई के निर्णायक समय पर खाद और बीज की किल्लत सरकार की कृषि नीतियों की विफलता का जीता-जागता प्रमाण है। बाजार से सस्ती डीएपी खाद का गायब होना और किसानों को महंगे विकल्पों को खरीदने के लिए विवश किया जाना, सीधे तौर पर खेती की लागत को डेढ़ गुना तक बढ़ा रहा है।
श्री दुबे ने आगे कहा कि भाजपा सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के दावे तो करती है, लेकिन धरातल पर वह केवल लागत बढ़ाने का काम कर रही है। देश का अन्नदाता अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है, जबकि सरकारी तंत्र केवल दावों और प्रचार में व्यस्त है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसान विरोधी नीतियों का खामियाजा अंततः देश की कृषि अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ेगा। सरकार को चाहिए कि वह राजनीति से ऊपर उठकर तत्काल प्रभाव से खाद-बीज और पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करे ताकि किसान अपनी खरीफ की फसल को सुरक्षित कर सकें।

Bhagvati Medatwal, Kota
नाम: भगवती मेड़तवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)
कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र
बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय
परिचय
भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।
