भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला: मनोज दुबे ने कार्रवाई की मांग की, मांझी के बयान को बताया निंदनीय
बिहार के भोजपुर में सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी के बहुचर्चित एनकाउंटर मामले पर देश भर में आक्रोश भड़क गया है। ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष मनोज दुबे ने पुलिसिया कार्रवाई और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बयान पर खड़े किए तीखे सवाल; जानिए क्या है पूरा मामला।

भारतीय राष्ट्रीय संयुक्त ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने कोटा में जारी बयान में भोजपुर के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में जांच और कार्रवाई की मांग उठाई।
कोटा, 22 जून। बिहार के भोजपुर में हुए बहुचर्चित सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब देशव्यापी तूल पकड़ लिया है। भारतीय राष्ट्रीय संयुक्त ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने इस कथित फर्जी एनकाउंटर को लेकर पुलिस प्रशासन और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ अविलंब और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है। मनोज दुबे ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस घटना के बाद से पूरे देश के ब्राह्मण समाज में भारी आक्रोश और असंतोष व्याप्त है।
इस संवेदनशील मामले पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए मनोज दुबे ने कहा कि भरत भूषण तिवारी अपने गांव और सर्व समाज के हक व अधिकारों के लिए मजबूती से आवाज उठाने वाले एक समर्पित समाजसेवी थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा सोची-समझी रणनीति के तहत उनका फर्जी एनकाउंटर किया गया और बाद में अपनी कार्रवाई को सही ठहराने के लिए उन्हें मानसिक रूप से विक्षिप्त घोषित कर दिया गया, जो कि घोर अन्याय और अत्याचार की पराकाष्ठा है।
प्रशासनिक और कानूनी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पूछा कि जब भरत भूषण तिवारी न तो कोई बड़े अपराधी थे और न ही उनके नाम कोई हिस्ट्रीशीट दर्ज थी, तो फिर किस आधार पर उनका एनकाउंटर किया गया? उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जब पुलिस खुद उन्हें मानसिक रूप से अस्वस्थ मान रही थी और उन्होंने आत्मसमर्पण (सरेंडर) भी कर दिया था, तो उसके बावजूद उन्हें चार गोलियां मारकर इस तरह निर्मम मौत के घाट क्यों उतारा गया?
मामले के राजनीतिक और आधिकारिक पहलुओं पर बात करते हुए मनोज दुबे ने केंद्र की भाजपा सरकार में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के रुख पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय, केंद्रीय मंत्री मांझी द्वारा बिहार में हुए इस एनकाउंटर को जायज ठहराना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, शर्मनाक और घोर निंदनीय है। इस घटना ने अब प्रशासनिक पारदर्शिता और न्याय व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसका असर दूर तक देखने को मिल रहा है।

Bhagvati Medatwal, Kota
नाम: भगवती मेड़तवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)
कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र
बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय
परिचय
भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।
