केशवराय पाटन में आचार्य प्रज्ञासागर जी ससंघ का मंगल आगमन, धर्मप्रिय जनों में उत्साह की लहर
केशवराय पाटन में 6 दिसंबर 2025 को आचार्य प्रज्ञासागर जी ससंघ का भव्य मंगल आगमन हुआ। चंबल नदी तट पर आयोजित स्वागत और मुख्य जिनालय में भक्ति एवं आनंद यात्रा ने धर्मप्रिय जनों में उत्साह की लहर पैदा की। गुरुदेव ने धर्म और आत्मज्ञान के महत्व पर गहन प्रवचन दिया।

कोटा। राजस्थान की पौराणिक नगरी केशवराय पाटन में शनिवार, 6 दिसंबर 2025 को दोपहर 3 बजे परम पूज्य आचार्य श्री 108 प्रज्ञासागर जी महाराज ससंघ का मंगल आगमन हुआ। पर्यावरण संरक्षण के प्रेरक, तपोभूमि के प्रणेता और धर्मनिष्ठ गुरुदेव के आगमन ने नगरवासियों और धर्मप्रेमियों में गहरा उत्साह उत्पन्न कर दिया।
गुरु आस्था परिवार के महामंत्री नवीन जैन दौराया ने बताया कि सांय 5:30 बजे आचार्यश्री के आगमन के साथ ही चंबल नदी तट पर आयोजित कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों ने सहभागिता की। मुख्य द्वार पर ससंघ का भव्य स्वागत हुआ और इसके उपरांत मुख्य जिनालय में मूलनायक भगवान मुनिसुव्रतनाथ की वेदी के समक्ष भक्ति और आनंद यात्रा संपन्न हुई। इस मार्ग में सोगरिया में मुनिश्री पावनसागर जी महाराज से सुमिलन भी हुआ।
आचार्यश्री के मार्ग में गुरुदेव स्टेशन मार्ग, भदाना, रंगपुर रोड और नदी मार्ग से होते हुए केशवराय पाटन पहुँचना, उनके जयकारों और भक्तों के उल्लासपूर्ण स्वागत का दृश्य मंत्रमुग्ध कर देने वाला था। इस अवसर पर गुरु आस्था परिवार के अध्यक्ष लोकेश जैन, चेयरमैन यतीश जैन खेडावाला, महामंत्री नवीन जैन दौराया समेत नीतेश बडजातिया, मनोज जैसवाल, अजय मेहरू, पारस पिडावा, भूपेंद्र पिडावा, पारस सोगानी, मनोज सेठी, संजय जैन और विकास जैन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
अध्यक्ष लोकेश जैन सीसवाली ने बताया कि मंगल आगमन के पश्चात सांय 7:30 बजे भक्ति एवं आनंद यात्रा आयोजित की गई। इसके अतिरिक्त रविवार, 7 दिसंबर को प्रातः 8:15 बजे अभिषेक–शांतिधारा, 8:30 बजे मंगल प्रवचन, 10 बजे आहारचर्या और सांय 6:30 बजे भक्ति एवं आनंद यात्रा का आयोजन प्रस्तावित है।
चेयरमैन यतीश जैन खेडावाला ने बताया कि मंगल विहार के दौरान समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में गुरु भक्तों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा और महत्ता को और बढ़ाया।
उधर, कोटा जंक्शन दिगंबर जैन मंदिर में जिनदर्शन के अवसर पर आचार्य प्रज्ञासागर जी महाराज ने ‘रयणसार’ की 64वीं गाथा का संदर्भ देते हुए कहा कि धर्म केवल क्रियाकांड भर नहीं है। पूजा, अभिषेक, शांतिधारा, व्रत और नियम तभी सार्थक हैं जब वे अंतर्मन से जुड़े हों। उन्होंने यह भी बताया कि भगवान के दर्शन आत्मा में निहित प्रतिभा को उजागर करने का माध्यम हैं। मंदिर जाते समय भगवान की ‘नकल’ करना आवश्यक है, क्योंकि नकल करते-करते मनुष्य ‘अकल’ प्राप्त करता है और यह प्रक्रिया उसे ‘केवली ज्ञान’ की अवस्था तक ले जाती है।
इस भव्य और प्रेरक मंगल आगमन ने न केवल केशवराय पाटन के धार्मिक वातावरण को समृद्ध किया, बल्कि आचार्य प्रज्ञासागर जी महाराज की शिक्षाओं के माध्यम से समाज में आत्मसाक्षात्कार और आध्यात्मिक चेतना का संदेश भी फैला।
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Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
