आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने कोटा में दिया सकारात्मक चिंतन का संदेश
रिद्धि-सिद्धि नगर के चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में विचारों की पवित्रता, आत्मचिंतन और सद्कर्मों के माध्यम से आत्मकल्याण का मार्ग बताया गया।

कोटा के रिद्धि-सिद्धि नगर स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा के दौरान श्रद्धालुओं को सकारात्मक जीवन और कर्म सिद्धांत का संदेश देतीं आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी।
श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्या भूषण सन्मति सागर जी महाराज की परम शिष्या एवं भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न 105 श्री स्वस्ति भूषण माताजी (ससंघ) के पावन सान्निध्य में आयोजित धर्मसभा में श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक साधना, सकारात्मक चिंतन और कर्म सिद्धांत का प्रेरणादायी संदेश दिया गया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने कहा कि मनुष्य का जीवन उसके विचारों के अनुरूप निर्मित होता है। यदि व्यक्ति का दृष्टिकोण और सोच सकारात्मक हो तो परिस्थितियां भी अनुकूल बनने लगती हैं। उन्होंने कहा कि “नजर बदलने से नजारे बदल जाते हैं और सोच बदलने से सितारे भी बदल सकते हैं।” उनके अनुसार विचारों की दिशा ही जीवन और भविष्य के निर्माण का आधार बनती है।
आर्यिका श्री ने कहा कि जिस प्रकार व्यक्ति सुखद बुढ़ापे के लिए युवावस्था में तैयारी करता है, उसी प्रकार श्रेष्ठ परलोक और आत्मकल्याण के लिए भी वर्तमान जीवन में साधना एवं सद्कर्म आवश्यक हैं। उन्होंने एकांत साधना को आत्मोन्नति का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि भीड़ में जीना सरल है, किंतु आत्मचिंतन और साधना ही जीवन को वास्तविक सार्थकता प्रदान करते हैं।
अपने उद्बोधन में उन्होंने चिंतामणि रत्न की कथा के माध्यम से विचारों की शक्ति का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मन में उत्पन्न होने वाले सकारात्मक अथवा नकारात्मक भाव ही व्यक्ति के सुख-दुःख और भाग्य के निर्माण का आधार बनते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने विचारों की पवित्रता, सकारात्मकता और शुद्धता बनाए रखने का निरंतर प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम में सकल दिगंबर जैन समाज के महामंत्री पदम बड़ला, मंदिर कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़ला, मनोज जैसवाल, पारस कासलीवाल, पारस लुहाड़िया, उत्तम जैन, टीकम पाटनी, पंकज खटोड़, पारस आदित्य, सेवानिवृत्त न्यायाधीश जितेंद्र कुमार, अशोक सांवाला, निर्मल अजमेरा, महावीर बड़ला, राजकुमार पाटनी, नरेंद्र कासलीवाल, अजीत गोधा, वर्धमान कासलीवाल, अनिल मित्तल, मनीष सेठी, संजय लुहाड़िया और विनोद टोरडी सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
धर्मसभा में दिए गए संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को सकारात्मक चिंतन, आत्मचिंतन, साधना और सद्कर्मों के महत्व से जोड़ते हुए यह संदेश दिया कि विचारों की शुद्धता ही व्यक्ति के जीवन, व्यक्तित्व और भविष्य को नई दिशा प्रदान करती है।

Pratahkal Bureau
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