धर्म, श्रद्धा और आत्मकल्याण के गूढ़ सिद्धांतों पर आधारित प्रेरणादायी संदेश देते हुए परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्या भूषण सन्मति सागर जी महाराज की परम शिष्या एवं भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न 105 श्री स्वस्ति भूषण माताजी (ससंघ) ने कहा कि संसार में मोह ही सबसे बड़ा बंधन है और सम्यक ज्ञान के बिना उससे मुक्ति संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्म बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करना ही प्रत्येक जीव का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।

श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका श्री ने श्रद्धालुओं को धर्म, सम्यक श्रद्धा, ज्ञान और कर्म सिद्धांत की महत्ता से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि धर्म मनुष्य जीवन की आधारशिला है। जिस प्रकार किसी वृक्ष की जड़ जितनी सुदृढ़ होती है, उसका विकास उतना ही अधिक होता है, उसी प्रकार जीवन में श्रद्धा जितनी दृढ़ होगी, धर्म उतना ही अधिक फलित और प्रभावी होगा।

आर्यिका माताजी ने कहा कि केवल श्रद्धा पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके साथ सम्यक ज्ञान का होना भी अनिवार्य है। आत्मा और परमात्मा के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान ही श्रद्धा को स्थिरता और मजबूती प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि वीतरागी परमात्मा समस्त कर्म बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष पद को प्राप्त कर चुके हैं और प्रत्येक जीव को भी उसी दिशा में अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए।

अपने प्रवचन में उन्होंने मोह को संसार का सबसे बड़ा बंधन बताते हुए कहा कि मनुष्य सर्वाधिक मोह अपने शरीर से करता है। इसके बाद वह घर, परिवार, धन-संपत्ति, सोना-चांदी, मित्रों तथा अन्य सांसारिक वस्तुओं के प्रति आसक्त हो जाता है। यही आसक्ति दुःख और बंधन का कारण बनती है तथा आत्मकल्याण के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा सिद्ध होती है।

धर्मसभा में सकल दिगंबर जैन समाज के महामंत्री पदम बड़ला, मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा, मंत्री पंकज खटोड़, कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़ला, मनोज जैसवाल, पारस बज आदित्य, पारस कासलीवाल, संजय सांवला, पारस लुहाड़िया, ईश्वर सोनी, उत्तम जैन, बसंती लाल दोषी, धर्मचंद गोधा, सुरेश दई वाले, विनोद सारसॉप, नितेश खटोड़, टीकम पाटनी, सेवानिवृत्त न्यायाधीश जितेंद्र कुमार, अशोक सांवाला, निर्मल अजमेरा, महावीर बड़ला, राजकुमार पाटनी, नरेंद्र कासलीवाल, अजीत गोधा, वर्धमान कासलीवाल, अनिल मित्तल, मनीष सेठी, संजय लुहाड़िया तथा विनोद टोरडी सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

धर्मसभा में दिए गए आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी के आध्यात्मिक संदेश ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, वैराग्य और मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा प्रदान की। कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना के वातावरण में संपन्न हुआ।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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