श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्या भूषण सन्मति सागर जी महाराज की परम शिष्या एवं भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न 105 श्री स्वस्ति भूषण माताजी (ससंघ) के पावन सान्निध्य में आयोजित धर्मसभा में श्रद्धालुओं को सम्यक दर्शन, आध्यात्मिक साधना और कर्म सिद्धांत का गहन संदेश प्राप्त हुआ। इस अवसर पर रिद्धि-सिद्धि नगर दिगंबर जैन समाज द्वारा मंगल चातुर्मास-2026 के लिए आर्यिका श्री को श्रीफल अर्पित कर विनम्र निवेदन भी किया गया।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने कहा कि जैन दर्शन का मूल उद्देश्य आत्मा को उसके वास्तविक स्वरूप का बोध कराना है। उन्होंने जैन धर्म के प्रमुख ग्रंथ तत्त्वार्थ सूत्र के प्रथम सूत्र “सम्यग्दर्शन-ज्ञान-चारित्राणि मोक्षमार्गः” का उल्लेख करते हुए कहा कि सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की एकता ही मोक्ष का मार्ग है।

उन्होंने कहा कि सम्यक दर्शन का अर्थ सच्चे देव, शास्त्र और गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा तथा आत्मा-परमात्मा के स्वरूप में विश्वास करना है। सम्यक दर्शन की प्राप्ति के बाद व्यक्ति पच्चीस दोषों से मुक्त होकर आठ अंगों से युक्त श्रद्धा को धारण करता है तथा सप्त व्यसनों का त्याग कर धर्ममार्ग पर अग्रसर होता है।

आर्यिका श्री ने जहाजपुर क्षेत्र के विभिन्न अतिशयों और चमत्कारों का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मा की पवित्र भावनाएं ही आध्यात्मिक उन्नति का आधार हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी जीव की भावना निर्मल और शुद्ध हो तो वह भी सम्यक दर्शन प्राप्त कर सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने भगवान महावीर के जीवन से जुड़ी एक प्रेरक घटना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि एक मेढ़क भगवान के चरणों की भक्ति भावना से उनकी ओर बढ़ रहा था, किंतु मार्ग में हाथी के पैर के नीचे दबकर उसकी मृत्यु हो गई। इसके बावजूद उसकी पवित्र भावना और श्रद्धा के प्रभाव से उसे श्रेष्ठ गति की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग स्पष्ट करता है कि बाहरी परिस्थितियों से अधिक महत्व अंतर्मन की शुद्धता और भावों की पवित्रता का होता है।

मंदिर समिति अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं महामंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि रिद्धि-सिद्धि नगर दिगंबर जैन समाज की ओर से मंगल चातुर्मास-2026 हेतु आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी को श्रीफल अर्पित कर ससंघ चातुर्मास के लिए विनम्र निवेदन किया गया।

कार्यक्रम में सकल दिगंबर जैन समाज के परम संरक्षक विमल जैन नांता, महामंत्री पदम बड़ला, मंदिर कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़ला, मनोज जैसवाल, पारस कासलीवाल, संजय सांवला, पारस लुहाड़िया, ईश्वर सोनी, उत्तम जैन, बसंती लाल दोषी, धर्म चंद गोधा, सुरेश दई वाले, विनोद सारसॉप, नितेश खटोड़, टीकम पाटनी, पंकज खटोड़, पारस बज आदित्य, सेवानिवृत्त न्यायाधीश जितेंद्र कुमार, अशोक सांवाला, निर्मल अजमेरा, महावीर बड़ला, राजकुमार पाटनी, नरेंद्र कासलीवाल, अजीत गोधा, वर्धमान कासलीवाल, अनिल मित्तल, मनीष सेठी, संजय लुहाड़िया एवं विनोद टोरडी सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

धर्मसभा में सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र के माध्यम से आत्मकल्याण एवं मोक्षमार्ग का संदेश केंद्र में रहा। साथ ही मंगल चातुर्मास-2026 के लिए किए गए श्रीफल समर्पण ने समाज की धार्मिक आस्था, संगठनात्मक एकता और आध्यात्मिक समर्पण को नई अभिव्यक्ति प्रदान की।

Pratahkal Bureau

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