आर्थिक अनुशासन: अरविन्द सिसोदिया ने पीएम मोदी के विजन का स्वागत किया
वैश्विक अस्थिरता के बीच अरविन्द सिसोदिया ने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और ऊर्जा संरक्षण के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत बनाने की अपील की है।

कोटा में वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए ऊर्जा संरक्षण और आर्थिक संयम के सुझावों का समर्थन किया।
कोटा, 12 मई। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए आर्थिक अनुशासन के मंत्र का पुरजोर स्वागत करते हुए देशवासियों से राष्ट्रहित में एकजुट होने की अपील की है। सिसोदिया ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में पश्चिम एशिया के युद्ध तनाव, विशेषकर ईरान-अमेरिका टकराव और होर्मुज स्ट्रेट संकट जैसी भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने दुनिया भर में ऊर्जा, रसायन और विदेशी मुद्रा का गंभीर संकट पैदा कर दिया है। लगातार बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें और आपूर्ति की अनिश्चितता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिससे निपटने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना आज की सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गई है।
राष्ट्रवादी सामाजिक चिंतक अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि आज देश का प्रत्येक नागरिक प्रधानमंत्री के विजन के साथ मजबूती से खड़ा है और राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर देशहित में आगे आना समय की मांग है। उन्होंने विश्वास जताया कि जिस तरह प्रधानमंत्री ने पूर्व में हर संकट को देशवासियों के सहयोग से परास्त किया है, उसी तरह इस वैश्विक आर्थिक दबाव का सामना भी आत्मसंयम और सावधानी से किया जाएगा। सिसोदिया ने प्रधानमंत्री द्वारा देशवासियों से किए गए पांच प्रमुख आग्रहों को रेखांकित करते हुए बताया कि नागरिकों को अब ऊर्जा संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा। इसमें पेट्रोल-डीजल की अनावश्यक खपत कम करना, छोटी दूरियों के लिए पैदल चलना या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना और वाहन शेयरिंग को बढ़ावा देना शामिल है।
सिसोदिया ने प्रधानमंत्री के सोने की खरीद से संबंधित आग्रह पर जोर देते हुए कहा कि भारत दुनिया के बड़े सोना आयातक देशों में से एक है और वर्तमान में सोने की कीमतें भी अत्यधिक हैं, जिससे विदेशी मुद्रा का भारी बहिर्गमन होता है। अतः राष्ट्रहित में कम से कम एक वर्ष तक नया सोना खरीदने से बचना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पर्यटन और विलासिता के लिए की जाने वाली गैर-जरूरी विदेश यात्राओं को टालने और 'वोकल फॉर लोकल' के तहत स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सके। बिजली, गैस और अन्य संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के माध्यम से आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करने पर बल देते हुए सिसोदिया ने अंत में दोहराया कि यदि प्रत्येक देशवासी थोड़े-थोड़े संयम का परिचय देगा, तो आत्मनिर्भर भारत का संकल्प और अधिक फौलादी बनेगा।

