भाजपा और मोदी सरकार ने बाबा साहब का मान-सम्मान बढ़ाया: अरविन्द सिसोदिया
कोटा में वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने बाबा साहब की जयंती पर कांग्रेस की नीतियों की आलोचना की और मोदी सरकार के पंचतीर्थ विकास कार्यों की सराहना की।

कोटा 13 अप्रैल। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अंबेड़कर की जन्मजयंती के अवसर पर कहा है कि "भारत रत्न बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेड़कर भारतीय राजनीती में समतामूलक समाज के महान निर्माता हैं वे ईश्वरीय प्रेरणा से ही भारत भूमि पर जन जन का उद्धार करने अवतरित हुये थे। उनका योगदान, परिश्रम और उपकार, भारत को सदियों तक मार्गदर्शित करता रहेगा।"
विभाजन और कांग्रेस की नीतियों पर प्रहार
सिसोदिया ने कहा कि "बाबा साहब ने 1940 में ही कह दिया था कि विभाजन किसी भी समस्या का हल नही है, इससे समस्या हल नहीं होगी। करना ही है तो संपूर्ण अदला बदली करें। किन्तु कांग्रेस ने उनकी बात नहीं मानी, देश बंटवा लिया और सांप्रदायिकता की समस्या और अधिक बढ़ गई है।" उन्होंने आगे कहा कि स्वतंत्रता से पूर्व और पश्चात् के कालखंड में बाबा साहब अंबेड़कर अपनी बौद्धिक क्षमता और दूरदृष्टि से राष्ट्रहित राजनैतिक समझ और लोककल्याण में हमेशा अग्रणी रहे। कांग्रेस ने हमेशा उनके विरुद्ध भेदभाव और अवरोध की राजनीती की, कठिनाईयां उत्पन्न कीं, यहाँ तक की चुनावी राजनीती में अपमानित करने तक की कोशिशें कीं, जो अक्षम्य है।
राष्ट्रहित में बाबा साहब की दूरदृष्टि
सिसोदिया ने कहा कि बाबा साहब देश विभाजन और पाकिस्तान निर्माण के घोर विरोधी थे, उन्होंने तब ही कह दिया था कि इससे यह समस्या खत्म नहीं होगी। वे तुष्टिकरण के सख्त खिलाफ थे और धारा 370 के प्रबल विरोधी थे। उन्होंने नेहरू सरकार की चीन और तिब्बत को लेकर किए गये निर्णय का भी विरोध किया था। कांग्रेस ने बाबा साहब को गंभीरता से लिया होता तो आज देश बहुत सारी समस्याओं से मुक्त होता।
संविधान सभा और चुनावी संघर्ष का सच
सिसोदिया ने कहा कि "बाबा साहब को कांग्रेस ने कभी सपोर्ट नहीं किया बल्कि वे अपनी योग्यता के आधार पर गोलमेज सम्मेलन में आमंत्रित किए गये, आरक्षण के द्वारा समानता का सफल संघर्ष उनका था। कांग्रेस ने उन्हें संविधान सभा में नहीं भेजा, बल्कि बंगाल के दलित नेता मंडल के सहयोग से वे उपचुनाव के माध्यम से संविधान सभा के लिए निर्वाचित हुये थे। वे योग्यता के आधार पर ड्राफ्ट कमेटी के अध्यक्ष बनें। भारत की प्रथम सरकार राष्ट्रीय सरकार थी, जिसका गठन अपरोक्ष ब्रिटिश सरकार की देख रेख में हुआ था। जिसमे बाबा साहब योग्यता के आधार पर केंद्रीय मंत्री थे, कांग्रेस का कहीं कोई योगदान नहीं था।"
वोट चोरी और भारत रत्न की उपेक्षा
डॉ. भीमराव अंबेडकर 1952 के लोकसभा चुनाव और 1954 के लोकसभा उपचुनाव लड़े थे, उनके खिलाफ कांग्रेस ने प्रत्याशी उतारा और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा उनके खिलाफ प्रचार किया गया जिससे वे लोकसभा सदन में नहीं पहुंच सके। सिसोदिया ने कहा कि "पहली वोट चोरी के शिकार बाबा साहब ही हुये थे, कांग्रेस ने कई कई हजार मतपत्र निरस्त करवा कर बाबा साहब को हरवाया था। हलांकि विपक्षी दलों के सहयोग से बाबा साहब तत्कालीन बांम्बे स्टेट से दो बार राज्यसभा पहुंचे और अपने विचारों को आगे बढ़ाते रहे। कांग्रेस तो इतनी निकृष्ट निकली कि उनके महान योगदान के लिए भारत रत्न तक नहीं दिया।"
भाजपा और मोदी सरकार द्वारा सम्मान
सिसोदिया ने कहा कि बाबा साहब को कांग्रेस ने भले ही भुलाने के तमाम षड्यंत्र किए मगर वे निष्पक्ष, न्यायप्रिय और राष्ट्रवादी विचारों के साथ भारतीय राजनीती के संवेधानिक इतिहास में सूर्य की भांति आज भी प्रकाशमान कर रहे हैं। बाबा साहब के मान सम्मान और ज्ञान को नई ऊँचाइंया देने में भाजपा का बड़ा योगदान है, 1990 में बाबा साहब को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित कराने में अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान भी था, तब भाजपा के समर्थन से वी पी सिंह सरकार सत्ता में थी।
पंचतीर्थ और विरासत का संरक्षण
बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने कई पहलें की हैं, जिसके प्रमुख कदमों में “पंचतीर्थ” का विकास किया गया। इसके तहत अंबेडकरजी से जुड़े पाँच महत्वपूर्ण स्थानों—जन्मभूमि (मऊ), दीक्षा भूमि (नहापुर), महापरिनिर्वाण स्थल (दिल्ली), चैत्य भूमि (मुंबई) और लंदन स्थित उनका निवास—को स्मारक स्थलों के रूप में विकसित किया गया। इसका उद्देश्य उनके जीवन और विचारों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुँचाना है। इसी प्रकार नई दिल्ली में डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र की स्थापना भी एक अहम पहल है। इसके अलावा, 26 नवंबर को हर साल संविधान दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की गई, ताकि संविधान और अंबेडकर के योगदान के प्रति जागरूकता बढ़े। सिसोदिया ने कहा कि इसके अतिरिक्त, अंबेडकरजी से जुड़े दस्तावेजों, लेखन और स्मारकों के संरक्षण और प्रसार के प्रयास भी किए गए हैं। सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से उनके विचार—विशेषकर समानता, शिक्षा और अधिकारों—को समाज में आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

Pratahkal Bureau
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