अरविन्द सिसोदिया बोले- कांग्रेस मानती बाबा साहब की बात तो अखंड रहता भारत
राजस्थान के वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने बाबा साहब की जयंती पर कांग्रेस की विभाजनकारी नीतियों और नेहरू सरकार द्वारा उनके अपमान का दावा किया।

राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की जन्मजयंती के अवसर पर कांग्रेस की ऐतिहासिक नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए भाजपा और मोदी सरकार द्वारा उनके सम्मान में किए गए कार्यों को रेखांकित किया है। सिसोदिया ने बाबा साहब को भारतीय राजनीति में समतामूलक समाज का महान निर्माता और ईश्वरीय प्रेरणा से जन-जन के उद्धार हेतु अवतरित विभूति बताते हुए कहा कि उनका योगदान, परिश्रम और उपकार भारत को सदियों तक मार्गदर्शित करता रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कांग्रेस ने बाबा साहब की दूरदृष्टि को समझा होता, तो राष्ट्र विभाजन की त्रासदी से बच सकता था।
विभाजन की विभीषिका पर प्रकाश डालते हुए सिसोदिया ने कहा कि बाबा साहब ने वर्ष 1940 में ही चेतावनी दे दी थी कि विभाजन किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और यदि यह करना ही है, तो संपूर्ण जनसंख्या की अदला-बदली की जानी चाहिए। कांग्रेस द्वारा उनकी बात अनसुनी करने के कारण ही देश का बंटवारा हुआ और सांप्रदायिकता की समस्या और अधिक विकराल हो गई। स्वतंत्रता के पूर्व और पश्चात के कालखंड में बाबा साहब अपनी बौद्धिक क्षमता से राष्ट्रहित और लोककल्याण में सदैव अग्रणी रहे, किंतु कांग्रेस ने उनके विरुद्ध भेदभाव, अवरोध और अपमान की राजनीति की। सिसोदिया के अनुसार, बाबा साहब देश विभाजन, पाकिस्तान निर्माण, धारा 370 और तुष्टिकरण के घोर विरोधी थे, साथ ही उन्होंने नेहरू सरकार की चीन और तिब्बत संबंधी नीतियों का भी विरोध किया था।
सिसोदिया ने कांग्रेस के दावों को नकारते हुए कहा कि बाबा साहब को कांग्रेस ने कभी समर्थन नहीं दिया, बल्कि वे अपनी योग्यता से गोलमेज सम्मेलन में आमंत्रित हुए और आरक्षण के माध्यम से समानता का संघर्ष किया। कांग्रेस ने उन्हें संविधान सभा में भेजने से रोका, जिसके बाद वे बंगाल के दलित नेता मंडल के सहयोग से उपचुनाव जीतकर वहां पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की प्रथम राष्ट्रीय सरकार में बाबा साहब योग्यता के आधार पर केंद्रीय मंत्री बने थे, जिसमें कांग्रेस का कोई योगदान नहीं था। इतना ही नहीं, वर्ष 1952 के लोकसभा चुनाव और 1954 के उपचुनावों में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उनके खिलाफ प्रत्याशी उतारकर और प्रचार कर उन्हें सदन में पहुंचने से रोका। सिसोदिया ने आरोप लगाया कि बाबा साहब पहली 'वोट चोरी' के शिकार हुए, जहाँ कांग्रेस ने हजारों मतपत्र निरस्त करवाकर उन्हें हरवाया, हालांकि विपक्षी दलों के सहयोग से वे बॉम्बे स्टेट से दो बार राज्यसभा पहुंचे।
अरविन्द सिसोदिया ने भाजपा के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि 1990 में भाजपा समर्थित वी.पी. सिंह सरकार के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी के प्रयासों से बाबा साहब को मरणोपरांत 'भारत रत्न' मिला। वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उनकी विरासत को सहेजने हेतु 'पंचतीर्थ' का विकास किया गया है, जिसमें जन्मभूमि (मऊ), दीक्षा भूमि (नागपुर), महापरिनिर्वाण स्थल (दिल्ली), चैत्य भूमि (मुंबई) और लंदन स्थित उनके निवास को स्मारक बनाया गया है। दिल्ली में डॉ. आंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र की स्थापना और 26 नवंबर को 'संविधान दिवस' के रूप में मनाने की पहल ने उनके विचारों को जन-जन तक पहुँचाया है। अंत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस के षड्यंत्रों के बावजूद बाबा साहब अपने राष्ट्रवादी विचारों के साथ भारतीय संवैधानिक इतिहास में सूर्य की भांति प्रकाशमान हैं।

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