कोटा। शिक्षा की नगरी कोटा में सामाजिक समरसता और सवर्ण अधिकारों को लेकर संघर्ष की ज्वाला धधक उठी है। भारत सरकार द्वारा यूजीसी के नियमों में किए गए हालिया संशोधनों को 'काला कानून' करार देते हुए विप्र समाज ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। 13 जनवरी 2026 को लागू किए गए इन नए नियमों को सवर्ण समाज के हितों पर कुठाराघात मानते हुए, बुधवार यानी 28 जनवरी को कोटा की सड़कों पर ब्राह्मण शक्ति का विराट संगम देखने को मिलेगा। विप्र समाज का तर्क है कि ये नियम न केवल सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करेंगे, बल्कि छात्र एकता को जातिगत आधार पर विभाजित कर सवर्ण समाज को मानसिक प्रताड़ना की ओर धकेलने का एक सुनियोजित प्रयास हैं। इस आंदोलन की गूँज अब गली-मोहल्लों से निकलकर सत्ता के गलियारों तक पहुँचने को तैयार है।

विरोध की इस मशाल को थामते हुए विप्र समाज के आह्वान पर सवर्ण वर्ग के हजारों लोग दोपहर 12 बजे सर्किट हाउस पर एकत्रित होंगे। यहाँ से एक विशाल हुंकार भरते हुए प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट तक मार्च करेंगे, जहाँ अपनी मांगों को लेकर देश के प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को एक सशक्त ज्ञापन सौंपा जाएगा। आंदोलनकारियों का स्पष्ट मत है कि यूजीसी द्वारा थोपे गए ये नियम छात्र समुदाय में वैमनस्य पैदा करेंगे, जिससे भविष्य की शैक्षणिक नींव कमजोर होगी। यह प्रदर्शन महज एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं, बल्कि विप्र समाज की अस्मिता, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ा जाने वाला एक धर्मयुद्ध बन चुका है। सवर्ण समाज के विभिन्न संगठनों ने इस कानून को तत्काल रद्द करने की मांग करते हुए अपनी एकजुटता का परिचय देने का संकल्प लिया है।

इस मुहिम को संगठनात्मक मजबूती प्रदान करते हुए विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भुवनेश्वर शर्मा (चच्चू भैया) ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने कोटा संभाग की सभी इकाइयों के अध्यक्षों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने जिला और तहसील स्तर पर इस 'काले कानून' के विरोध में लामबंद हों और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराएं। आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे देश में यूजीसी के इन प्रावधानों के खिलाफ असंतोष की लहर दौड़ गई है। कोटा में होने वाला यह प्रदर्शन सरकार के लिए एक कड़ा संदेश होगा कि यदि नीतियों में सुधार नहीं किया गया, तो न्याय और समानता के लिए यह स्वर और अधिक मुखर होगा। यह लड़ाई अब अन्याय के विरुद्ध एकजुट होकर मजबूती से खड़े होने की है।

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