कोटा, 28 मई। साहित्य, संस्कृति और भारतीय चिंतन की समृद्ध परंपरा को नई दिशा देने के संकल्प के साथ अखिल भारतीय साहित्य परिषद, राजस्थान का 9वां प्रदेश अधिवेशन 30 और 31 मई को कोटा में आयोजित होने जा रहा है। इस दो दिवसीय साहित्यिक महाकुंभ का मूल विषय ‘आत्मबोध से विश्वबोध मंथन’ रखा गया है, जो व्यक्ति से विश्व तक चेतना के विस्तार पर गहन संवाद का आधार बनेगा।

आयोजन की तैयारियों के क्रम में गुरुवार को इसके आमंत्रण पत्र का विमोचन सहसंयोजक महेश विजय, संयोजक विष्णु शर्मा, सहसंयोजक राजेन्द्र गौड़, कोटा विभाग संयोजक योगराज योगी, प्रचार मंत्री राजेन्द्र मोरपा एवं प्रांतीय उपाध्यक्ष राजेन्द्र गौड़ सहित परिषद के अनेक पदाधिकारियों द्वारा किया गया। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अन्नाराम शर्मा एवं प्रदेश महामंत्री डॉ. केशव शर्मा ने जानकारी दी कि चित्तौड़ प्रांत के तत्वावधान में यह अधिवेशन तलवंडी स्थित राजकीय आयुर्वेदिक योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय में संपन्न होगा, जिसमें प्रदेशभर से प्रबुद्ध साहित्यकार, शिक्षाविद्, चिंतक और परिषद के पदाधिकारी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

मुख्य संयोजक विष्णु शर्मा ने स्पष्ट किया कि दो दिवसीय आयोजन में प्रांतीय बैठक, लोकमंथन, बाल साहित्य, लोक साहित्य और संगठनात्मक विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। साथ ही, ‘आत्मबोध से विश्वबोध’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य भारतीय जीवन-दृष्टि, सांस्कृतिक चेतना और साहित्यिक संवाद को व्यापक सामाजिक सरोकारों से जोड़ना है।

सहसंयोजक महेश विजय ने कार्यक्रम की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि 30 मई को प्रातः 10:45 बजे उद्घाटन सत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के मुख्य आतिथ्य में होगा। इस सत्र की अध्यक्षता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुशील चंद्र त्रिवेदी करेंगे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. पवनपुत्र बादल उपस्थित रहेंगे। अधिवेशन के समापन समारोह का आयोजन 31 मई को दोपहर 12 बजे होगा, जिसमें कृषि विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. विमला डूंकवाल मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगी। कार्यक्रम को बड़े महाप्रभुजी मंदिर, पाटनपोल के अधिष्ठाता पूज्य विनय कुमार महाराज का सान्निध्य प्राप्त होगा, जबकि अध्यक्षता परिषद के अखिल भारतीय महामंत्री डॉ. भरत ठाकोर करेंगे।

इस साहित्यिक आयोजन में प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकारों की सक्रिय भागीदारी रहेगी और उनके द्वारा रचित चार नवीन पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा। ज्ञातव्य हो कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद वर्ष 1966 से राष्ट्रीय स्तर पर साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से भारतीय चिंतन को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्यरत है। राजस्थान में परिषद की गतिविधियाँ चित्तौड़, जयपुर और जोधपुर प्रांतों के माध्यम से संचालित होती हैं, जिनमें चित्तौड़ प्रांत वर्ष 1970 से निरंतर सक्रिय है।

Pratahkal Newsroom

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