कोटा, नवम्बर 2025: राजस्थान में एयरटेल के उपभोक्ताओं की सेवा में पिछले एक वर्ष से लगातार व्यवधान देखा जा रहा है। इसका मुख्य कारण तेजस द्वारा बीएसएनएल साइटों पर लगाए गए रेडियो उपकरणों से उत्पन्न क्रॉस-बैंड हस्तक्षेप है। तकनीकी समाधान के लिए कई बार चर्चा और परीक्षण होने के बावजूद अभी तक कोई स्थायी सुधार नहीं किया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हस्तक्षेप का मूल कारण तेजस उपकरणों में इस्तेमाल किए गए बैंड-पास फिल्टर की भारत के 800 एमएचजेड बैंड के निर्धारित मानकों से असंगति है। इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण एयरटेल का 900 एमएचजेड स्पेक्ट्रम प्रभावित हो रहा है और अन्य ऑपरेटरों के नेटवर्क के लिए हानिकारक स्थिति उत्पन्न हो रही है। भारत के अन्य उपकरण निर्माताओं ने दशकों से सख्त मानकों का पालन करते हुए फिल्टर डिज़ाइन किए हैं, जो केवल निर्दिष्ट आवृत्तियों में संचालन सुनिश्चित करते हैं।

एयरटेल ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि तेजस को तुरंत अपने उपकरणों के फिल्टर्स भारत की बैंड योजना के अनुरूप पुनः कैलिब्रेट करने चाहिए और बीएसएनएल की सभी साइटों पर मानक के अनुसार बैंड-पास फिल्टर लगाना चाहिए। पत्र में राजस्थान और महाराष्ट्र के स्पेक्ट्रम प्लॉट की तुलना भी साझा की गई है। इसमें स्पष्ट दिखाया गया है कि राजस्थान में 800 एमएचजेड बैंड से एयरटेल के 900 एमएचजेड बैंड में हस्तक्षेप हो रहा है, जबकि महाराष्ट्र में आवश्यक फिल्टर्स लगाए जाने के कारण यह समस्या नहीं है।

इस पत्र को एयरटेल के मुख्य नियामक अधिकारी राहुल वत्स द्वारा लिखा गया और इसे भारत सरकार के उच्च पदाधिकारियों तथा संबंधित टेलीकॉम प्रमुखों को भी भेजा गया है। एयरटेल ने 'मेक इन इंडिया' पहल का समर्थन करते हुए इंडिजिनस टेलीकॉम उपकरण निर्माताओं के सहयोग की सराहना की, लेकिन तेजस द्वारा तकनीकी मानकों की अनदेखी और जिम्मेदारी से बचने का आरोप लगाया है।

इस स्थिति के चलते आम जनता को असुविधा उठानी पड़ रही है और एयरटेल की सेवा देने की क्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आवश्यक सुधार तुरंत नहीं किए गए, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

Pratahkal Bureau

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