आचार्य ऋतुराज शर्मा बोले: प्रकृति की पूजा ही परमात्मा की प्रत्यक्ष पूजा है
कोटा के विजयवर्गीय मांगलिक भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पूजा के आध्यात्मिक महत्व पर चर्चा की गई।

कोटा के दादाबाड़ी स्थित विजयवर्गीय मांगलिक भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन गोवर्धन पूजा के अवसर पर आरती करते श्रद्धालु और आयोजक।
माखन लीला का आध्यात्मिक रहस्य
कोटा के दादाबाड़ी स्थित विजयवर्गीय मांगलिक भवन में जारी श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर कथा व्यास आचार्य ऋतुराज शर्मा ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि माखन लीला का आध्यात्मिक अभिप्राय अत्यंत गूढ़ है, जिसमें "देह रूपी मटकी से नवनीत रूपी मन को चुराने की लीला ही माखन चोर लीला कहलाती है क्योंकि परमात्मा को केवल विशुद्ध मन ही प्रिय है।"
क्रोध का त्याग और दामोदर लीला
दामोदर लीला का प्रसंग सुनाते हुए आचार्य ने भक्तजनों को विशेष सीख दी:
- भक्ति के मार्ग पर क्रोध का त्याग आवश्यक है।
- स्वयं भगवान ने मटकी पर क्रोध किया तो उन्हें भी उखल से बंधना पड़ा।
- अतः प्रत्येक मनुष्य को अपने मन को निर्मल रखकर क्रोध से बचना चाहिए।
गोवर्धन पूजा: प्रकृति संरक्षण का संदेश
कथा के दौरान गोवर्धन पूजा का विशेष महत्त्व बताते हुए आचार्य ने कहा कि "प्रकृति की पूजा ही परमात्मा की प्रत्यक्ष पूजा है और गिरिराज पर्वत की पूजा के माध्यम से भगवान कृष्ण ने समस्त मानवता को प्रकृति के संरक्षण का संदेश दिया है, जो भगवत प्राप्ति का एक सरल सोपान है।" इस पावन अवसर पर गोवर्धन की अत्यंत सुंदर झांकी सजाई गई, जहां उपस्थित सभी भक्तों ने भाव-विभोर होकर झांकी की परिक्रमा की।
आरती एवं प्रसाद वितरण
कथा के उपरांत निम्नलिखित गणमान्य जनों ने सपरिवार आरती संपन्न की और सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया:
- राधेश्याम विजय
- रतन विजय
- बलविंद्र सिंह
- मनोज जैन
- शिवचरण विजय
- प्रिया विजय
- रामचरण विजय
- मुकेश विजय
- भगवानदास माहेश्वरी
- चंद्रशेखर चौहान

Pratahkal Bureau
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