डॉ. आचार्य राजानन्द शास्त्री का वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज, कोटा में हुआ भव्य स्वागत
ज्योतिषाचार्य डॉ. राजानन्द शास्त्री ने रामयंत्र की महत्ता पर प्रकाश डाला और यूजीसी कानून को सामाजिक सौहार्द के लिए विभाजनकारी बताते हुए विरोध जताया।

वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के बाद कोटा पहुंचे प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. आचार्य राजानन्द शास्त्री पत्रकारों को रामयंत्र की दिव्यता और समसामयिक विषयों पर जानकारी देते हुए।
कोटा। अध्यात्म और ज्योतिष के क्षेत्र में पितृ दोष निवारण हेतु राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान स्थापित करने वाले प्रख्यात ज्योतिषाचार्य एवं श्री रामलला अयोध्या जी सेवा समिति अयोध्या धाम के अध्यक्ष डॉ. आचार्य राजानन्द शास्त्री ने 'वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड' में अपना नाम दर्ज कराकर समूचे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के पश्चात कोटा आगमन पर गौतम समाज द्वारा दादाबाड़ी स्थित गौतम वाटिका में उनका भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। गरिमामय समारोह के दौरान समाज के प्रबुद्धजनों ने डॉ. शास्त्री को साफा बांधकर, माल्यार्पण कर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके यशस्वी कार्यों की सराहना की। इस अवसर पर भाजपा देहात महामंत्री विशाल शर्मा, गौतम समाज दादाबाड़ी के संरक्षक जगमोहन गौतम, वरिष्ठ समाजसेवी राजेन्द्र गौतम, गौतम आश्रम तालेड़ा के प्रवक्ता अनिल गौतम, गौतम समाज दादाबाड़ी के अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा, प्रवीण पंचोली, रवि गौतम, रमेश गौतम तथा श्याम बिहारी गौतम सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
समारोह के उपरांत पत्रकारों से वार्ता करते हुए डॉ. आचार्य राजानन्द शास्त्री ने रामयंत्र की दिव्यता और उसके चमत्कारी प्रभावों पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि श्री रामलला का रामयंत्र, जिसे रामरक्षा यंत्र भी कहा जाता है, अत्यंत प्रभावशाली है और इसकी महत्ता वर्तमान में वैश्विक स्तर पर प्रमाणित हो रही है। यह यंत्र रामरक्षा स्त्रोत से पूर्णतः अभिमंत्रित होता है, जिसमें हनुमान जी महाराज स्वयं कीलक के रूप में विद्यमान रहते हैं और भगवान सिया-राम इसके अधिष्ठाता देव हैं। डॉ. शास्त्री ने यंत्र की संरचना स्पष्ट करते हुए कहा कि आठ पंखुड़ियों वाले इस यंत्र में धन के अधिपति कुबेर जी का स्थान नियत है, जो परिवार और व्यवसाय में सुख-समृद्धि का संचार करता है। इसमें अष्टदिशाओं का इस प्रकार निर्माण किया गया है कि इसके स्थापन मात्र से उस स्थान के समस्त वास्तुदोष स्वतः ही विलुप्त हो जाते हैं। उन्होंने प्रमाण स्वरूप उल्लेख किया कि राम मंदिर निर्माण के मार्ग में आई समस्त बाधाएं इसी यंत्र की शक्ति से निर्मूल हुईं और मंदिर निर्माण निर्विघ्न संपन्न हुआ। उन्होंने यह भी साझा किया कि भारत की राष्ट्रपति द्वारा भी अयोध्या में इस दिव्य यंत्र का पूजन कर इसे द्वितीय तल पर पुनः स्थापित किया गया है। वर्तमान में श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज के मार्गदर्शन में इस यंत्र का प्रसार देशभर में हो रहा है और शीघ्र ही इसे राजस्थान के जन-जन तक सुलभ कराने की योजना है।
सनातन धर्म की रक्षा का आह्वान करते हुए डॉ. शास्त्री ने युवाओं को अपनी संस्कृति और शास्त्रों से जुड़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म शाश्वत है और यद्यपि कुछ शक्तियां इसे खंडित करने का षड्यंत्र रचती हैं, परंतु सनातन सदैव सर्वधर्म समभाव का पक्षधर रहा है। उन्होंने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे मंत्रों की शक्ति को जागृत करें और शास्त्र ज्ञान अर्जित कर आगामी पीढ़ी के लिए धर्म की नींव सुदृढ़ करें। इसी क्रम में डॉ. शास्त्री ने यूजीसी कानून पर प्रहार करते हुए इसे सामाजिक सौहार्द के लिए विभाजनकारी करार दिया। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि एक ओर "बंटोगे तो कटोगे" के नारों से एकजुटता की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर सत्तासीन होने पर ऐसे कानून लाए जाते हैं जो समाज को विभक्त करने का कार्य करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था का स्वरूप ऐसा कदापि नहीं होना चाहिए जिससे भेदभाव या असंतुलन उत्पन्न हो। उन्होंने बल दिया कि शिक्षा का मूल कार्य समाज को जोड़ना है, अतः कोई भी वैचारिक दूरी बढ़ाने वाले कानून का विरोध अनिवार्य है। उन्होंने मांग की कि देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने के लिए शिक्षा संबंधी निर्णय पूर्ण पारदर्शिता और जन-सहभागिता के साथ ही लिए जाने चाहिए।

Pratahkal Newsroom
प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
