कोटा। शिक्षा नगरी कोटा के आकाश में जब तिरंगा लहराया, तो मानों हर धड़कन राष्ट्रभक्ति के सुरों में ढल गई। अवसर था 77वें गणतंत्र दिवस का, जिसे वरिष्ठ नागरिक संस्थान ने केवल एक पर्व की तरह नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण और शौर्य की गाथा के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया। संस्थान के अध्यक्ष टीपीएस सेठी के नेतृत्व में आयोजित इस भव्य समारोह ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि उम्र के पड़ाव चाहे जो भी हों, राष्ट्र के प्रति सम्मान और एकता का जज्बा सदैव सर्वोपरी रहता है। कार्यक्रम का विधिवत आगाज़ झंडारोहण और सामूहिक राष्ट्रगान की गूँज के साथ हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह में ऊर्जा का संचार कर दिया।

समारोह में सैन्य गरिमा और गौरव का संगम तब देखने को मिला जब संस्थान के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन ब्रिगेडियर एन एस कपूर ने भारतीय सेना के अदम्य साहस और उच्च स्तरीय कार्यप्रणाली से सभी को रूबरू करवाया। सेना की सक्षमता और राष्ट्र की सीमाओं पर उनके बलिदान की गाथा सुनकर उपस्थित सदस्यों की आँखें गर्व से नम हो गईं। इसी क्रम में सैन्य अधिकारी कर्नल सुशील जैन, कर्नल अमरजीत सहौटा, कर्नल एसएस छाबड़ा और लेफ्टिनेंट कर्नल डीएन शर्मा ने देश की अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था पर प्रकाश डाला। इन अधिकारियों ने नागरिकों को उनके मौलिक कर्तव्यों की याद दिलाते हुए एक सशक्त भारत के निर्माण में जन-भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया।

संस्थान की सचिव तनुजा खन्ना ने सभी आगंतुकों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कार्यक्रम की महत्ता को रेखांकित किया। वहीं अध्यक्ष टीपीएस सेठी ने अपने संबोधन में 'एकता, समानता और राष्ट्र सम्मान' को जीवन का मूल मंत्र बताया। उन्होंने नैतिक मूल्यों के पालन का आह्वान करते हुए 'वंदे मातरम' राष्ट्र गीत को एक जन अभियान बनाने पर जोर दिया, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस गौरवशाली विरासत से जुड़ सकें। महासचिव डी के अरोड़ा ने न केवल कार्यक्रम का कुशल संचालन किया, बल्कि अपने उद्बोधन में उन अज्ञात शहीदों और बलिदानियों को भी याद किया जिनके रक्त से इस गणतंत्र की नींव सींची गई है।

उत्सव का रंग तब और गहरा गया जब देशभक्ति की थीम पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मनोरंजक खेलों का आयोजन किया गया। क्विज प्रतियोगिता में सदस्यों ने अपनी कुशाग्र बुद्धि का परिचय दिया, जहाँ विजेताओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। सदस्यों द्वारा दी गई मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया और पूरा परिसर 'भारत माता की जय' के नारों से गुंजायमान रहा। अंत में, अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद राष्ट्रगान के साथ इस गरिमामय समारोह का समापन हुआ। यह आयोजन समाज के वरिष्ठ नागरिकों के बीच राष्ट्रवाद की भावना को जीवंत रखने का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा।

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