कोटा में उमड़ा आस्था का सैलाब: श्याम बाबा के जयकारों से गुंजायमान हुआ ट्रांसपोर्ट नगर, हजारों ने चखा महाप्रसादी का स्वाद
कोटा के ट्रांसपोर्ट नगर में श्री श्याम महोत्सव और भजन संध्या का भव्य आयोजन हुआ। 26 जनवरी को आयोजित विशाल भंडारे में 3,500 से अधिक श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण की। पंकज बजाज के संयोजन में श्री श्याम मित्र मंडल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में आशीष अग्रवाल, मयंक जैन सहित कई समाजसेवियों ने सेवाएं दीं। भक्ति और सेवा का यह संगम कोटा के लिए यादगार रहा।

कोटा। शिक्षा नगरी कोटा के ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में इन दिनों भक्ति और श्रद्धा की एक ऐसी बयार बही कि हर कोई श्याम बाबा के रंग में रंगा नजर आया। अनंतपुरा स्कीम स्थित स्काई पार्क मल्टी के समीप आयोजित 'श्री श्याम महोत्सव' ने न केवल क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया, बल्कि सांप्रदायिक सद्भाव और सेवा की एक अनूठी मिसाल भी पेश की। इस भव्य आयोजन का चरमोत्कर्ष 26 जनवरी को आयोजित विशाल भंडारे के रूप में देखने को मिला, जहाँ आस्था का महाकुंभ उमड़ पड़ा।
कार्यक्रम का आगाज श्री श्याम मित्र मंडल संस्था के तत्वावधान में आयोजित भजन संध्या के साथ हुआ, जहाँ बाबा श्याम के भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए। इसके पश्चात गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आयोजित महाप्रसादी में श्रद्धालुओं का सैलाब इस कदर उमड़ा कि दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक सेवा का यह सिलसिला अनवरत चलता रहा। आयोजन संयोजक पंकज बजाज के कुशल नेतृत्व में करीब 3,500 से अधिक श्रद्धालुओं ने पूर्ण अनुशासन और श्रद्धाभाव के साथ महाप्रसादी ग्रहण की।
इस धार्मिक आयोजन की सफलता के पीछे निस्वार्थ सेवा की एक लंबी फेहरिस्त रही। कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करने और सुव्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करने में शहर के प्रमुख समाजसेवियों ने अपनी महती भूमिका निभाई। सेवा कार्यों में आशीष अग्रवाल, मयंक जैन, लाकेश अग्रवाल, जतिन, हरिश बजाज, राजेश गोयल, कमल अग्रवाल, अंकित अग्रवाल और दीपक अग्रवाल सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। इन सेवादारों के समर्पण का ही परिणाम था कि हजारों की भीड़ के बावजूद वितरण व्यवस्था सुचारू बनी रही और हर भक्त को बाबा का प्रसाद सुलभ हुआ।
आयोजन संयोजक पंकज बजाज ने बताया कि संस्था का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना ही नहीं, बल्कि समाज में एकता और सेवा की भावना को प्रबल करना है। श्याम बाबा के दरबार में उमड़ी यह भीड़ इस बात का प्रमाण है कि आज के आधुनिक युग में भी सनातन संस्कृति और भक्ति की जड़ें बेहद गहरी हैं। शाम ढलते-ढलते यह उत्सव न केवल एक आयोजन बनकर रह गया, बल्कि कोटा वासियों के दिलों में भक्ति की एक अमिट छाप छोड़ गया। अंततः यह महोत्सव आस्था, विश्वास और सामूहिक सेवा के एक सफल संगम के रूप में संपन्न हुआ।

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