कोटा। शिक्षा की काशी कहे जाने वाले कोटा की धरती एक बार फिर हजारों विद्यार्थियों के संकल्प और सपनों की साक्षी बनी। अवसर था मोशन एजुकेशन द्वारा आयोजित भव्य 'महा ओरिएंटेशन' प्रोग्राम का, जिसने द्रोणा-2 कैम्पस में एक नया इतिहास रच दिया। संगीत की धुनों, देशभक्ति के जज्बे और भावनाओं के अनूठे संगम के बीच संस्थान के संस्थापक और विख्यात शिक्षाविद नितिन विजय (एनवी सर) ने विद्यार्थियों को सफलता का वह मूलमंत्र दिया, जिसने वहां मौजूद हजारों अभिभावकों और छात्रों की सोच को नई दिशा प्रदान की।

कार्यक्रम का आगाज राष्ट्रगान की गूंज के साथ हुआ, जिससे पूरा परिसर ऊर्जा से सराबोर हो गया। मंच संभालते ही नितिन विजय ने सीधा संवाद स्थापित करते हुए कहा कि सफलता की पहली सीढ़ी वर्तमान अंकों के बोझ से खुद को आजाद करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने मस्तिष्क को "रीवायर" करने का आह्वान किया। विशेष रूप से छात्राओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कड़वे तथ्यों को सामने रखा और बताया कि आज भी इंजीनियरिंग में महिलाओं की भागीदारी 20 प्रतिशत से कम और सर्जरी के क्षेत्र में महज 12.5 प्रतिशत है। शकुंतला देवी का उदाहरण देते हुए उन्होंने इस रूढ़िवादी सोच पर प्रहार किया कि गणित और भौतिकी जैसे विषय लड़कियों के लिए कठिन हैं। उन्होंने नासा में कार्यरत 35.5 प्रतिशत महिलाओं और देश की 87.6 प्रतिशत महिला एथलीट्स का हवाला देते हुए छात्राओं को नई ऊंचाइयां छूने के लिए प्रेरित किया।

नितिन विजय ने भारतीय मेधा की वैश्विक धाक का जिक्र करते हुए बताया कि स्पेल बी जैसी प्रतियोगिताओं में 80 प्रतिशत छात्र भारतीय मूल के होते हैं, जो यह सिद्ध करता है कि प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस सही मार्गदर्शन और माहौल की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को देश को सर्वोपरि रखने की शपथ दिलाई और अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डाला। कछुए और खरगोश की प्रसिद्ध कहानी के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल गति काफी नहीं है, बल्कि निरंतरता ही असली ताकत है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने माता-पिता के जीवन के अनुशासन से सीखने और मोबाइल फोन की आभासी दुनिया से बाहर निकलकर आत्मनिरीक्षण करने की सलाह दी।

शिक्षाविद ने सचिन तेंदुलकर, स्टीव जॉब्स और नाथन मिलस्टीन जैसे दिग्गतों के जीवन संघर्षों का उदाहरण देते हुए समझाया कि बड़ी सोच के साथ निरंतर अभ्यास ही व्यक्ति को महान बनाता है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि लक्ष्य चाहे कितने भी बड़े हों, लेकिन फोकस प्रतिदिन की तीन घंटे की ईमानदार पढ़ाई पर होना चाहिए। नॉर्थ पोल अभियान और लकड़हारे की कहानी के जरिए उन्होंने यह संदेश दिया कि अपनी कुल्हाड़ी की धार को निरंतर तेज करना (स्वयं में सुधार करना) ही सफलता का एकमात्र शॉर्टकट है। कार्यक्रम के अंत में हजारों विद्यार्थियों ने एक स्वर में अपने लक्ष्य के प्रति संकल्प लिया। अभिभावकों ने इस आयोजन को न केवल शिक्षा की दिशा तय करने वाला बताया, बल्कि इसे जीवन जीने के नजरिए को बदलने वाला एक परिवर्तनकारी अनुभव करार दिया।

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Pratahkal Newsroom

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