कोटा के विज्ञान नगर में भगवान ऋषभदेव के निर्वाण दिवस पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, 48 दीपकों की लौ से आलोकित हुआ भक्तामर पाठ
कोटा के विज्ञान नगर में प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का निर्वाण दिवस मोक्ष कल्याणक महोत्सव के रूप में धूमधाम से मनाया गया। अभिषेक, शांति धारा और निर्वाण मोदक अर्पण के साथ ही शाम को 48 दीपों से भक्तामर पाठ का आयोजन हुआ। समाज अध्यक्ष राजमल पाटोदी ने भगवान ऋषभदेव को भारतीय संस्कृति का आधार बताया। पढ़ें इस भव्य धार्मिक समागम की पूरी रिपोर्ट।

कोटा। शिक्षा नगरी कोटा के विज्ञान नगर स्थित दिगंबर जैन मंदिर में प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का निर्वाण दिवस 'मोक्ष कल्याणक महोत्सव' के रूप में अपार श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ आयोजित किया गया। भक्ति के इस महापर्व में समूचा जैन समाज आदिनाथ भगवान की स्तुति में लीन नजर आया। कार्यक्रम की शुरुआत ब्रह्ममुहूर्त में भगवान आदिनाथ के मंत्रोच्चारित अभिषेक और शांति धारा के साथ हुई। इस पावन अवसर पर शांति धारा करने का परम सौभाग्य बाबूलाल, अनिल और नरेश रैबारपुरा परिवार को प्राप्त हुआ, वहीं भगवान पारसनाथ की शांति धारा का पुण्य अर्जन अनिल व आयुष बाकलीवाल परिवार द्वारा किया गया।
महामंत्री अनिल जैन ठोरा ने आयोजन की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि महोत्सव के दौरान भगवान आदिनाथ की विधि-विधान से पूजन-अर्चना की गई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से निर्वाण कांड का पाठ किया और भक्ति के चरम पर पहुंचते हुए निर्वाण मोदक अर्पित किए। इस धार्मिक समागम को संबोधित करते हुए समाज अध्यक्ष राजमल पाटोदी ने भगवान ऋषभदेव की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि भगवान ऋषभदेव भारतीय संस्कृति के मूल आधार स्तंभ हैं और यह गौरव की बात है कि उनके ही जेष्ठ पुत्र चक्रवर्ती भरत के नाम पर इस पावन धरा का नाम 'भारत' पड़ा।
इस भव्य आयोजन की व्यवस्थाओं और गरिमामय उपस्थिति में महामंत्री अनिल ठौरा, रितेश सेठी, कार्याध्यक्ष पारस जैन, अमित जैन (चीकू), सीताराम जैन, देवेंद्र गंगवाल, पदम पटवारी और इंद्रकुमार जैन सहित समाज के कई गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु सम्मिलित रहे। दिनभर चले धार्मिक अनुष्ठानों के पश्चात संध्याकाल में मंदिर परिसर भक्ति के अनूठे रंग में रंगा नजर आया।
शाम को मंदिर में भव्य महाआरती का आयोजन किया गया, जिसके पश्चात 48 दीपों के साथ रिद्धि मंत्रों का उच्चारण करते हुए भक्तामर पाठ संपन्न हुआ। दीपों की झिलमिलाती रोशनी और मंत्रों की गूंज ने पूरे वातावरण को अलौकिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस भक्ति संध्या में भाग लेकर धर्म लाभ अर्जित किया। यह महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि इसने समाज में एकता और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता का भी संचार किया।

Pratahkal Bureau
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